मध्यप्रदेश में बारिश ने दस्तक दे दी, खरीदी केंद्रों में रखे अनाज पर संकट के बादल

राज्य सरकार कह रही है निसर्ग तूफान की वजह से 15 दिन पहले बारिश आ गई और वह सारे ज़रूरी कदम उठाएगी, लेकिन ज़मीनी हालात अलग

मध्यप्रदेश में बारिश ने दस्तक दे दी, खरीदी केंद्रों में रखे अनाज पर संकट के बादल

मध्यप्रदेश में एक खरीदी केंद्र में खुले आसमान के नीचे रखा गेंहू.

भोपाल:

मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश हो रही है, बारिश से गर्मी तो निजात मिली है लेकिन दूसरी मुश्किल खड़ी हो गई है, कई खरीदी केन्द्रों में अब भी किसान फसल लेकर खड़े हैं वहीं खरीदे गए लाखों टन गेंहू का परिवहन नहीं हुआ है. सरकार कह रही है निसर्ग तूफान की वजह से 15 दिन पहले बारिश आई है ऐसे में वो सारे ज़रूरी कदम उठाएगी लेकिन ज़मीन पर हालात ठीक नहीं हैं.
      
विदिशा जिले के कई खरीदी केन्द्रों पर गेंहू भीग गया, किसानों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे, गेंहू के साथ चना भी भीगा.आंधी के साथ बारिश के चलते विदिशा कुरवाई, सिरोंज, लटेरी और बासौदा क्षेत्र के खरीदी केन्द्रों पर हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया. जिले में समर्थन मूल्य के 199 खरीदी केन्द्रों पर हर रोज 20 से 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई, परिवहन के लिए प्रशासन ने ठेकेदारों को अलग-अलग क्षेत्र बांटे लेकिन वाहनों की कमी के चलते परिवहन की गति भी थम गई है.

रूप नारायण मीणा केंद्र पर चने लेकर आए थे 15 दिन इंतज़ार के बाद भी चने की फसल नहीं तुल सकी अचानक तेज़ बारिश से खुले में लाई चने की ट्रॉली में भरा चना पूरी तरह भीग गया. चने लेकर आए थे, 15 दिन से रुके थे हर दो चार दिन ओके करके फिर फेल कर देते हैं, कल बोला कि खरीद लो मौसम खराब होने वाला है लेकिन एक कांटा चल रहा है, अब ये हालात हैं.
    
जिले भर में अभी 30 हजार टन परिवहन होना बाकी बचा है परिवहन और बारदाने की कमी के कारण कई केंद्रों पर खुले में गेंहू चने की फसल पड़ी है .

सीहोर में भी कृषि उपज मंडी में प्लास्टिक की बोरी में और खुले आसमान के तले रखा हजारों क्विंटल गेंहू बारिश की भेंट चढ़ गया.  आसपास के खरीदी केंद्रों से गेहूं परिवहन करने की तैयारी की जा रही थी, बारदाने की कमी और परिवहन ना होने की वजह से यहां गेहूं खुले में भी पड़ा था और प्लास्टिक की बोरियों में हजारों बोरी यहां पर खुले आसमान के नीचे कृषि उपज मंडी में रखी थी जो बीती रात अचानक हुई बारिश के चलते भीग गई.

मामले में जानकारी देते हुए सोसायटी प्रबंधक भारत सिंह चौहान ने बताया कि अचानक हुई बारिश के चलते गेहूं कुछ भीग गया परिवहन नहीं होने से गेंहू यहां रखा हुआ था करीब 1500 मीट्रिक टन गेंहू है जिन्हें पानी से बचाने इंतजाम किए गए हैं. अचानक बारिश आ गई, पैकेजिंग हो गई थी थोड़ा रह गया, कोशिश पूरी की है पैकिंग कर दें.
     
देवास जिले में हजारों क्विंटल गेंहू बारिश की भेंट चढ़ गया. किसान खुद भींग रहे है, चादर में खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ किसान रिश्वत मांगे जाने के आरोप भी लगा रहे हैं.

सिवनी में 98 खरीदी केंद्रों में 4.3 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदा गया जिसमें अभी भी खुले आसमान के नीचे 1.43 लाख मिट्रिक टन अनाज पड़ा हुआ है, बारिश में किसी को बारदाना नसीब हुआ तो कुछ भीगता ही रहा. सहायक आपूर्ति अधिकारी हेमंत मेश्राम ने कहा कुछ केन्द्रों पर गेंहू गीला हो गया है, परिवहन तेज करने की आवश्यकता है, प्रयास जारी हैं.

बड़वानी में बारिश में चने को लेकर फिक्र दिखी, लेकिन गनीमत थी कि ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. हालांकि सरकार का कहना है कि किसानों को नुकसान नहीं होगा. वरिष्ठ मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा 1 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं मध्य प्रदेश की सरकार अब तक खरीद चुकी है, 96% गेहूं हमने गोदामों में पहुंचा दिया है अधिकांश जिलों में गेहूं की खरीद बंद हो गयी है. ये सही है कि गेंहू का नुकसान हो रहा है, लेकिन किसान का नहीं ... किसानों के खाते में पैसा जा चुका है.

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राज्य में इस बार गेंहू की बंपर खरीद हुई है 125 लाख मीट्रिक टन. जिसमें दावा है कि 112 लाख मीट्रिक टन का परिवहन हो गया है, यानी 13 लाख मीट्रिक टन खुले में रखा है. हालांकि सब मिलाकर सरकारी भंडारण क्षमता 50 लाख मीट्रिक टन है. गेंहू के अलावा चना, मसूर, सरसों भी सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है, सरकार कह रही है किसानों को फिक्र करने की जरूरत नहीं है उनके खाते में पैसा जा चुका है,जी बिल्कुल लेकिन जनता का क्या जिसके पैसे आप पानी में बहा रहे हैं मंत्रीजी.