राजस्थान में सचिन पायलट की 'घर वापसी' के पीछे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे फैक्टर

Rajasthan Crisis: कांग्रेस ने भाजपा पर अपने विधायकों को लालच देकर राज्य में सत्ता छीनने का आरोप लगाते हुए आधिकारिक रूप से पर अशोक गहलोत सरकार को संकट से दूर रखा, इसे कांग्रेस की "आंतरिक समस्या" कहा

राजस्थान में सचिन पायलट की 'घर वापसी' के पीछे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे फैक्टर

Rajasthan Government Crisis: वसुंधरा राजे सिंधिया (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

कांग्रेस (Congress) में सचिन पायलट (Sachin Pilot) के विद्रोह और इससे उपजे संकट के हालात एक महीने तक बने रहे. इसके पीछे राजस्थान में भाजपा (BJP) की वास्तविकता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया (Vasundhara Raje Scindia) की अहम भूमिका थी. राजस्थान विधानसभा में शक्ति परीक्षण की संभावना से ठीक चार दिन पहले सचिन पायलट की राहुल गांधी के साथ मुलाकात ने सुलह के लिए मंच तैयार कर दिया.

कांग्रेस ने बीजेपी पर अपने विधायकों को लालच देकर राज्य में सत्ता छीनने का आरोप लगाते हुए आधिकारिक रूप से अशोक गहलोत सरकार को संकट से बचाए रखा. इसे कांग्रेस की "आंतरिक समस्या" कहा गया.

बीजेपी के राजस्थान प्रमुख सतीश पूनिया ने ट्वीट किया, "हम सब कह रहे थे - यह कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई है और वे अनावश्यक रूप से बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं. गरीब राजस्थान को कांग्रेस की 31 दिवसीय रामलीला देखनी थी ... बहन प्रियंका गांधी और भाई राहुल गांधी देर से जागे. उन्होंने कहा " अब जब आपका संकट हल हो गया है, तो लोगों से माफी मांगें और कुछ काम करें. "

गहलोत ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह उनके पूर्व डिप्टी सचिन पायलट की तख्तापलट करने में मदद कर रही है. कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर भी कांग्रेस विधायकों को रिश्वत देने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया और एक ऑडियो टेप के आधार पर उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई.

कांग्रेस ने कहा कि यह इस तथ्य में भी साफ था कि सचिन पायलट के 18 बागी बीजेपी शासित हरियाणा में रिसॉर्ट में रह रहे थे. जब राजस्थान से एक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम ने सौदा करने के आरोपी बागी विधायकों की तलाश की तो उन्हें हरियाणा के पुलिस कर्मियों की एक बड़ी टीम ने रोक दिया. सूत्रों का कहना है कि कोरोनो वायरस संक्रमितों का क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए एक भवन में बीजेपी नेताओं के साथ बागी विधायकों की गुप्त बैठकों की इजाजत दी गई थी.

हालांकि बीजेपी आधिकारिक रूप से यही जाहिर करती रही कि न तो उसका कांग्रेस के संकट से कुछ भी लेना देना है, न ही वह शक्ति परीक्षण की इच्छुक है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी के पास कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि उसके राजस्थान के 'पॉवर हाउस' वसुंधरा राजे सिंधिया ने जोरदार चुप्पी साध रखी है.

वसुंधरा राजे ने कथित तौर पर कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए बागी विधायकों के साथ कोई योजना बनाने से इनकार किया. बीजेपी को एक बैठक को मजबूरन रद्द किया गया था जिसमें उन्हें भाग लेना था. हालांकि बताया जाता है कि ऐसी कोई योजना नहीं थी.

पिछले माह राजस्थान में जब से कांग्रेस में बगावत का दौर शुरू हुआ, वसुंधरा राजे ने इस दौरान सिर्फ एक ट्वीट 18 जुलाई को किया. इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों को कांग्रेस के संकट की कीमत चुकानी पड़ रही है. उन्होंने लिखा कि "बीजेपी और बीजेपी नेताओं के नाम पर कीचड़ उछालने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है. " 

सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सहयोग के बिना बीजेपी कुछ अधिक नहीं कर सकती थी. राजस्थान ऐसा राज्य है जहां क्षेत्रीय नेताओं का वर्चस्व केंद्रीय नेताओं के मुकाबले अधिक है. राज्य में बीजेपी के 72 विधायक हैं जिनमें से 45 एमएलए वसुंधरा के कट्टर समर्थक और विश्वसनीय हैं.

मुख्यमंत्री अशोक का दावा है कि उनको 200 सदस्यों वाली विधानसभा में 102 का समर्थन हासिल है. यह बहुमत के आंकड़े के बहुत थोड़ा अधिक है. कांग्रेस के बागी 19 विधायक, बीजेपी के 72 विधायकों और क्षेत्रीय दलों व निर्दलीय विधायकों के साथ सरकार के लिए चुनौती खड़ी करते रहे.           

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बागी विधायक गहलोत का साथ छोड़कर आने वाले और कांग्रेस विधायकों का इंतजार करते-करते थक गए. शायद बागी विधायकों ने महसूस किया कि उनके लिए बीजेपी से बातचीत आगे बढ़ाने के लिए बहुत कम संभावना थी.

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