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राजीव गांधी हत्‍याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारीवलन की दया याचिका को कोर्ट रिकॉर्ड में रखा

राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट दो हफ्ते बाद करेगा. कोर्ट ने याचिकाकर्ता दोषी पेरारीवलन के आग्रह को मान लिया है, जिसमें कहा गया कि उन्होंने राज्यपाल के पास दया याचिका दाखिल की थी.

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राजीव गांधी हत्‍याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारीवलन की दया याचिका को कोर्ट रिकॉर्ड में रखा

राजीव गांधी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट दो हफ्ते बाद करेगा. कोर्ट ने याचिकाकर्ता दोषी पेरारीवलन के आग्रह को मान लिया है, जिसमें कहा गया कि उन्होंने राज्यपाल के पास दया याचिका दाखिल की थी. इसे दो साल हो चुके हैं. इसलिए वो इस याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में रखना चाहते हैं.  राजीव गांधी हत्याकांड मामले में केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सात दोषियों की रिहाई का विरोध किया था. 

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कहा वो तमिलनाडु सरकार के सातों दोषियों की रिहाई से सहमत नहीं है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया कि ये मामला देश से एक पूर्व प्रधानमंत्री की नृशंस हत्या से जुड़ा है, जिन्हें विदेशी आतंकी संगठन ने सुनियोजित तरीके से हत्या की इसमें 16 निर्दोष लोग मारे गए, कई लोग जख्मी हुए. इसमें नौ सुरक्षाकर्मी भी मारे गए. केंद्र सरकार ने कहा है कि जिस तरह से महिला मानव बम से ये हत्या की गई उसे ट्रायल कोर्ट ने भी रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस माना. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी इससे सहमत हुए.

केंद्र की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि ये हत्या इस तरह नृंशस तरीके से की गई कि इसके चलते देश में लोकसभा व विधानसभा चुनाव भी टालने पड़े. इसी साल 23 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि तमिलनाडु सरकार के फरवरी 19, 2014 को भेजे गए उस प्रस्ताव पर तीन महीने में फैसला ले जिसमें 27 सालों से जेल में बंद राजीव गांधी के सात हत्यारों की रिहाई करने को कहा गया था. 

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दरअसल, दिसंबर 2015 में पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा था कि राज्य सात दोषियों मुरुगन, संथन, पेरारीवलन (जिनकी मौत की सजा को उम्रकैद की सजा में बदल दिया गया था) और नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रवीचंद्रन को स्वत: संज्ञान लेकर उम्रकैद की सजा से रिहाई नहीं दे सकती. पीठ ने ये माना था कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामलों में राज्य सरकार सिर्फ केंद्र सरकार की सहमति से ही सजा में छूट दे सकती है. हालांकि, पीठ ने कहा था कि दोषियों की सजा में छूट देने के फरवरी 19, 2014 के तमिलनाडु सरकार के आदेश की वैधता के लिए निर्धारित सिद्धांतों के प्रकाश में तीन जजों की बेंच द्वारा फिर से विचार किया जाएगा.

 


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