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अमित शाह या स्मृति ईरानी की सीट जीतने का सपना देख रही कांग्रेस अब N=[T/(S+1)]+1 फॉर्मूले में फंसी

आपको बता दें कि गुजरात विधासभा चुनाव में सीटों की संख्या 182 है और वर्तमान में कुल सदस्य 175 हैं. इसमें से बीजेपी के पास 100 और कांग्रेस के पास 71 सीटों हैं.

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अमित शाह या स्मृति ईरानी की सीट जीतने का सपना देख रही कांग्रेस अब N=[T/(S+1)]+1 फॉर्मूले में फंसी

5 जुलाई को गुजरात से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होगा

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी कांग्रेस की याचिका
  2. गुजरात की दो सीटों पर राज्यसभा चुनाव अलग-अलग होगा
  3. अब 5 जुलाई को होगा चुनाव
नई दिल्ली:

अमित शाह और स्मृति ईरानी  के लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद गुजरात से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो गई हैं. कांग्रेस चाहती थी कि दोनों सीटों पर एक साथ चुनाव कराए जाएं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी की मांग को खारिज कर दिया है. अब दोनों सीटों पर भी 5 जुलाई को चुनाव होंगे. अब इसके साथ ही कांग्रेस की इन दो सीटों में से एक सीट जीतने का प्लान भी फेल होता जा नजर आ रहा है. हालांकि न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अवकाश पीठ ने गुजरात कांग्रेस को दोनों सीटों पर उपचुनाव संपन्न होने के बाद ‘चुनाव याचिका' दायर करने की छूट दी है. चुनाव याचिका के माध्यम से संसदीय, विधायी और स्थानीय चुनावों के परिणाम पर सवाल उठाए जा सकते हैं. यह याचिका गुजरात में कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता परेशभाई धनानी ने दायर की थी.  याचिका में कहा गया था कि एक ही दिन दोनों सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना असंवैधानिक और संविधान की भावना के खिलाफ है. दरसअल, चुनाव आयोग की अधिसूचना की मुताबिक अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाणपत्र 23 मई को ही मिल गया था, जबकि स्मृति ईरानी को 24 मई को मिला. इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया. इसी आधार पर आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन चुनाव एक ही दिन होंगे.

कैसे हुआ कांग्रेस को नुकसान
आपको बता दें कि गुजरात विधासभा चुनाव में सीटों की संख्या 182 है और वर्तमान में कुल सदस्य 175 हैं. इसमें से बीजेपी के पास 100 और कांग्रेस के पास 71 सीटों हैं. राज्यसभा चुनाव के लिए विधायक अब इन दोनों सीटें पर 2 अलग-अलग बैलट से वोट करेंगे. उम्मीदवार को जीतने के लिए 88 वोटों की जरूरत होगी. लेकिन कांग्रेस के पास सिर्फ 71 ही विधायक हैं. इस लिहाज से कांग्रेस के पास इन दोनों सीटों के जीतने का कोई मौका नहीं नजर नहीं आ रहा है.  


N= [T/(S+1)] +1 फॉर्मूले में फंसी कांग्रेस
राज्यसभा का चुनाव N= [T/(S+1)] +1 फॉर्मूले पर होता है. यहां N का मतलब जीत के लिए जरूरी वोट. T का मतलब कुल वोटरों की संख्या, S का मतलब कुल खाली सीटें.

अब इस फॉर्मूले के हिसाब से राज्यसभा चुनाव का गणित कुछ ऐसा है, N= [175/(2+1)] +1 अब इसको अगर और सरल करें तो N= [175/(3)] +1 = 59.3333333 यानी एक सीट के लिए प्रथम वरीयता वोटों की संख्या 60 होगी. यानी एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत सकती थी अगर दोनों सीटों पर एक साथ चुनाव कराए जाते. लेकिन अलग-अलग चुनाव कराए जाने पर अब हर सीट के लिए वोटों की जरूरत पड़ेगी 88. 

क्या कहा चुनाव आयोग ने
चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल करते हुए दो सीटों पर अलग- अलग चुनाव कराने के अपने फैसले को सही ठहराया है और कहा था कि कांग्रेस की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. हलफनामे में कहा गया था कि अमित शाह और स्मृति ईरानी की खाली हुई सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना कानून के मुताबिक है. चुनाव आयोग 1957 से यह चुनाव कराता आया है. साथ ही कहा गया कि चुनाव आयोग पहले से ही कैजुएल रिक्तियों के लिए अलग-अलग चुनाव कराता आया है. जब किसी सदस्य की राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल खत्म होता है तो वो रेगुलर वेकेंसी होती है, जिसके लिए एक साथ ही चुनाव कराया जाता है. चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के सत्यपाल मलिक मामले के फैसले का हवाला दिया है, जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि कैजुअल वैकेंसी को अलग-अलग चुनाव से भरा जाएगा. 

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