विपक्ष रहा गैरमौजूद, राज्यसभा में दो दिन में 15 विधेयक पारित हो गए

आरएसएस से जुड़ा भारतीय मज़दूर संघ श्रम सुधार विधेयकों के पारित होने से नाराज, कहा- सरकार ने जल्दबाजी में बिल पारित कराए

विपक्ष रहा गैरमौजूद, राज्यसभा में दो दिन में 15 विधेयक पारित हो गए

राज्यसभा में दो दिन में 15 विधेयक पारित किए गए.

नई दिल्ली:

सरकार ने विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद राज्यसभा (Rajya Sabha) में पिछले सिर्फ दो दिनों में 15 बिल पारित करा लिए. बुधवार को राज्यसभा में आठ बिल पारित हुए जिनमें श्रम सुधार से जुड़े तीन विवादित लेबर कोड बिल (Labor code bills) शामिल हैं. आरएसएस (RSS) से जुड़े भारतीय मज़दूर संघ ने कहा है कि सरकार ने जल्दबाजी में ये बिल पारित कराए हैं और उनकी मांगों को सरकार ने बिल में शामिल नहीं किया है.

बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार ने संसद के मानसून सत्र को समय से पहले ख़त्म करने की मंशा जाता दी. संसदीय कार्य राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, सरकार ने सदन का सत्र इसकी तय अवधि से पहले समाप्त करने का फैसला कर लिया है. 

कुछ ही देर बाद विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद श्रम मंत्री ने विवादित तीन श्रम कोड्स बिल - सोशल सिक्युरिटी कोड 2020, कोड ऑन ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020 और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 को चर्चा के लिए सदन में पेश कर दिया. विपक्षी सांसद संसद परिसर में प्रदर्शन करते रहे  और राज्य सभा में चर्चा चलती रही. 

सोशल सिक्युरिटी कोड 2020 के तहत एम्प्लॉई स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के तहत कामगारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का अधिकार देने का प्रावधान 566 से बढाकर 740 जिलों में किया गया है. ईपीएफओ का कवरेज 20 कामगारों वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा. वर्तमान में यह केवल अनुसूची में शामिल प्रतिष्ठानों पर लागू था. 20 से कम कामगारों वाले प्रतिष्ठानों को भी ईपीएफओ में शामिल होने का विकल्प दिया जा रहा है.

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साथ ही, मजदूरों की स्वस्थ्य और व्यावसायिक सुरक्षा के लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता 2020 में कामगारों के लिए वर्ष में एक बार निःशुल्क चिकित्सा जांच और पहली बार कामगारों को नियुक्ति पत्र प्राप्त करने का कानूनी अधिकार दिया गया है. लेबर कोड में प्रवासी कामगारों के लिए राष्ट्रीय डाटाबेस के निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल है.

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि नई श्रम संहिताओं में 50 करोड़ से अधिक संगठित, असंगठित तथा स्व-नियोजित कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा आदि का प्रावधान किया गया है.

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संसद के अंदर और बाहर विरोध और विपक्ष द्वारा सदन के बहिष्कार के बीच सरकार ने तीनों लेबर कोड बिल पारित तो करा लिया लेकिन उसके सामने अब अगली चुनौती संघ परिवार के अंदर से उठ रहे सवालों से निपटना होगा. भारतीय मज़दूर संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार ने ये तीनों बिल जल्दबाज़ी में पारित कराए हैं और उनकी मुख्य मांगों को सरकार ने नज़रअंदाज़ कर दिया.

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भारतीय मजदूर संघ के जोनल सेक्रेटरी पवन कुमार ने  NDTV से कहा "सरकार ने हमारी महत्वपूर्ण मांगें नहीं मानी हैं. हमने मांग की थी कि सोशल सिक्युरिटी कोड के तहत देश के हर मजदूर को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का फायदा मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया सरकार ने. हमने यह भी मांग की थी कि कोड ऑन ऑक्युपेशनल सेफ्टी में जो सुरक्षा के प्रावधान हैं वर्करों के लिए, उसे भी यूनिवर्सलाइज किया जाए. लेकिन जो बिल पारित हुआ है उसमें जोखिमपूर्ण उद्योगों में सुरक्षा सिर्फ उन मजदूरों को दी जाएगी जो उन निकायों में काम करते हैं जहां 10 या 10 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं. इसको लेकर भारतीय मजदूर संघ का एक बड़ा विरोध सरकार के सामने है.''

भारतीय मज़दूर संघ के नेताओं ने अब दो अक्टूबर से एक वर्चुअल बैठक बुलाई है जिसमें विरोध की रणनीति तय की जाएगी.