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राज्यसभा चुनाव 2018 : सिर्फ एक दिन में अमित शाह ने पलटकर रख डाली बिसात, मायावती मुश्किल में

शुक्रवार को राज्यसभा की 31 में 10 सीटों का फैसला उत्तर प्रदेश में होगा, जहां BJP ने नौ प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं.

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राज्यसभा चुनाव 2018 : सिर्फ एक दिन में अमित शाह ने पलटकर रख डाली बिसात, मायावती मुश्किल में

अमित शाह की फाइल फोटो

खास बातें

  1. प्रत्येक उम्मीदवार को 37 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी
  2. सपा को अपने लोगों को एकजुट रखने में हो रही परेशानी
  3. कम से कम 8 सीटें जीतने को लेकर आश्‍वस्‍त है
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों पर अहम उपचुनाव हार जाने के बाद BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की खेल में वापसी होती नज़र आई, जब समाजवादी पार्टी के सात विधायकों ने एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक में शिरकत नहीं की. राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसा होना समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के लिए अच्छी ख़बर नहीं है, और न ही यह बहुजन समाज पार्टी, यानी BSP सुप्रीमो मायावती के लिए खुशख़बरी है, जिनका संसद के उच्च सदन में एक सीट पाने का ख्वाब टूटता नज़र आने लगा है.

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कुछ ही दिन पहले अखिलेश यादव और मायावती ने 25 साल पुरानी प्रतिद्वंद्विता को भुला दिया था, और BJP का गढ़ मानी जाने वाली दो लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जीत गए थे. इसके बाद राज्यसभा चुनाव के दौरान 'इस हाथ दे, उस हाथ ले' के समझौते के तहत अखिलेश यादव के विधायक मायावती की पार्टी को समर्थन देने वाले हैं.
 
शुक्रवार को राज्यसभा की 31 में 10 सीटों का फैसला उत्तर प्रदेश में होगा, जहां BJP ने नौ प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और BSP ने एक-एक उम्मीदवार को उतारा है. उत्तर प्रदेश में प्रत्येक उम्मीदवार को 37 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी. BJP कम से कम आठ सीटें जीत जाने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है, क्योंकि उसके पास विधानसभा में 311 सदस्य हैं. उधर, 47 विधायकों वाली समाजवादी पार्टी भी एक प्रत्याशी को जिता ले जाएगी. समाजवादी पार्टी ने कहा था कि उसके 10 अतिरिक्त विधायक मायावती की BSP की मदद करेंगे, जिसके पास कुल 19 विधायक हैं, जो ज़रूरत से काफी कम हैं. सो, कांग्रेस के सात तथा अजित सिंह की पार्टी के एक विधायक के समर्थन से BSP का राज्यसभा प्रत्याशी जीत सकता है.

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लेकिन एमित शाह की चल गई, तो ऐसा नहीं हो पाएगा...
 
अब समाजवादी पार्टी को अपने लोगों को एकजुट रखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उनके सात विधायक, जिनमें अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव शामिल हैं, बुधवार सुबह लखनऊ में हुई एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए. अतीत में कांग्रेस, BSP तथा समाजवादी पार्टी में रह चुके और हाल ही में BJP के सदस्य बने नरेश अग्रवाल के पुत्र भी गैरहाज़िर रहे समाजवादी पार्टी के विधायकों में शामिल थे. पार्टी के एक नेता को भरोसा है कि ये सभी सदस्य एक लक्ज़री होटल में आयोजित किए जाने वाले रात्रिभोज में शिरकत करेंगे. समाजवादी पार्टी के विधायक पारसनाथ यादव ने कहा, "अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी एकजुट है... जो इस वक्त नज़र नहीं आए, वे बाद में आ जाएंगे... मतदान के दिन हमारे सभी विधायक एक साथ होंगे..."
 
लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्हें नरेश अग्रवाल के पुत्र के वोट की कोई उम्मीद नहीं रही है. बाकी विधायकों में से एक जेल में हैं. सूत्रों के मुताबिक, मोहम्मद आज़म खान तथा उनके पुत्र बैठक में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनका समर्थन हमारे साथ है. शिवपाल यादव तथा दो अन्य विधायक भी हमारे संपर्क में हैं, और हमारे ही पक्ष में वोट करेंगे.

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पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान शिवपाल यादव के करीबी कम से कम सात विधायकों ने BJP के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान किया था. BJP पूरी कोशिश कर रही है कि मायावती का प्रत्याशी हार जाए, और इसीलिए वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यवसायी अनिल अग्रवाल का समर्थन कर रही है, वरना यह सीट निश्चित रूप से BSP जीत सकती थी. अब चूंकि BJP मुकाबले की कोशिश में है, सो, प्रदेश में क्रॉस-वोटिंग होने और यहां तक कि खरीद-फरोख्त के भी आसार दिखने लगे हैं.
 
बुधवार शाम को BJP भी अपने सभी विधायकों तथा राज्यसभा प्रत्याशियों के साथ बैठक करने जा रही है.सो, मंगलवार से अब तक अमित शाह ने सभी चालें ऐसी चली हैं, जो उनकी जीत के आसार पैदा रही हैं - वह एक नाराज़ सहयोगी दल को मनाने में कामयाब रहे हैं, और BJP के राज्यसभा प्रत्याशी के लिए उनके चार विधायकों का समर्थन हासिल कर चुके हैं.

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और अब बुधवार को समाजवादी पार्टी की बैठक में से सात विधायकों के गैरहाज़िर रहने के पीछे भी अमित शाह की ही भूमिका मानी जा रही है.


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