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अलीमुद्दीन हत्याकांड: झारखंड के पहले लिंचिंग मामले में सजा का ऐलान, 11 दोषियों को उम्रकैद

रामगढ़ में देश के पहले लिंचिंग (गौमांस को लेकर भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या) के चर्चित अलीमुद्दीन हत्याकांड मामले में रामगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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अलीमुद्दीन हत्याकांड: झारखंड के पहले लिंचिंग मामले में सजा का ऐलान, 11 दोषियों को उम्रकैद

रामगढ़ में गौमांस ले जाने का आरोप लगाते हुए अलीमुद्दीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी

खास बातें

  1. मामले में कुल 12 आरोपियों को पकड़ा गया था
  2. लगभग आठ महीने में ही केस से जुड़ी सुनवाई पूरी कर ली गई
  3. मृतक अलीमुद्दीन की पत्नी ने रामगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया था
रांची : रामगढ़ में देश के पहले लिंचिंग (गौमांस को लेकर भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या) के चर्चित अलीमुद्दीन हत्याकांड मामले में रामगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने इस मामले में 11 आरोपियों को दोषी करार दिया था. दोषियों को कोर्ट ले जाते वक्‍त गेट पर जय श्री राम का नारा लगाए गए. 

गौ मांस को लेकर भीड़ द्वारा एक व्यक्ति को पीट पीटकर मार डालने के अलीमुद्दीन हत्याकांड मामले की रामगढ़ फा‌स्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने इस मामले में 12 मे से 11 अभियुक्तों को धारा 302 के तहत दोषी करार दिया था. एक अभियुक्त को जुवेनाइल करार दिया गया.

केस की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील किया गया था. वहीं केस की सुनवाई के दौरान परिजन व कई राजनीतिक पाटियों के लोग भी बड़ी संख्या में कोर्ट में मौजूद थे. 

रामगढ़ थाना क्षेत्र में 29 जून को स्थानीय बाजार टांड़ के समीप भीड़ ने अलीमुद्दीन को गौमांस तस्कर बताकर जमकर पीटा था. उसकी मारुति वैन में आग लगा दी थी. बाद में अस्पताल ले जाते हुए अलीमुद्दीन की मौत हो गई थी. इस मामले में कुल 12 आरोपियों को पकड़ा गया था जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं. इनमें गोरक्षा समिति के छोटू वर्मा, दीपक मिश्रा, छोटू राणा, संतोष सिंह, भाजपा जिला मीडिया प्रभारी नित्यानंद महतो, विक्की साव ,सिकंदर राम, रोहित ठाकुर, विक्रम प्रसाद, राजू कुमार, कपिल ठाकुर, छोटू राणा हैं.

सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक (रामगढ़) एसके शुक्ला ने केस की कार्रवाई पूरी कराई. राज्य सरकार ने एक वर्ष में मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए फास्ट ट्रैक का गठन किया था. फास्ट ट्रैक न्यायालय में लगभग आठ महीने में ही केस से जुड़ी सुनवाई पूरी कर ली गई.

लोक अभियोजक एसके शुक्ला ने बताया कि मृतक अलीमुद्दीन की पत्नी ने रामगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया था. इसके बाद सरकार की ओर से 19 गवाहों व 20 प्रदर्श को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था. आरोपियों की ओर से एक गवाही हुई थी. इसके बाद न्यायाधीश ओम प्रकाश ने सभी 11 आरोपियों को धारा 147/148/149/427/435/302 IPC के तहत दोषी करार दिया है जिसमें अधिकतम मृत्यु दंड व न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.

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बचाव पक्ष के अधिवक्ता बीएम त्रिपाठी ने कहा कि यह मामला कस्टडी में मौत का है. चूंकि वह गंभीर स्थिति में पुलिस द्वारा ले जाया गया था इसलिए यह पुलिस कस्टडी में मौत का मामला है. हम अगले 60 दिनों में हाईकोर्ट में अपील करेंगे.


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