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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद: 6 वर्षों बाद सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. 6 वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करने जा रहा है.

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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद: 6 वर्षों बाद सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

इससे पहले 2010 में इस केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया था.(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. इससे पहले 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया
  2. सुप्रीम कोर्ट मध्‍यस्‍थता की कर चुका है पेशकश
  3. शिया वक्‍फ बोर्ड की याचिका पर भी सुनवाई
नई दिल्‍ली:

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर दाखिल करीब 20 याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दोपहर दो बजे सुनवाई होगी. इस मामले से जुड़े पक्षकारों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. 6 वर्ष बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई करने जा रहा है. जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. दरअसल कुछ दिन पहले ही CJI खेहर ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के जल्द सुनवाई के अनुरोध पर कहा था कि वो सोच रहे हैं कि जल्द सुनवाई के लिए बेंच का गठन कर दिया जाए.

पढ़ें: शिया वक्‍फ बोर्ड ने कहा-मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई, याचिका पर SC में सुनवाई

मध्‍यस्‍थता की पेशकश
इससे पहले सुनवाई में कोर्ट ने सलाह दी थी कि सभी पक्षों को आपसी सहमति से मसले का हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि ऐसी स्थिति में मध्यस्थता के लिए किसी जज की नियुक्ति की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संवेदनशील और आस्था से जुड़ा बताते हुए पक्षकारों से बातचीत के जरिये आपसी सहमति से मसले का हल निकालने को कहा था.


पढ़ें: सीएम योगी आदित्‍यनाथ का पहला अयोध्‍या दौरा, हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन किए

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VIDEO: कोर्ट के फैसले को चुनौती

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
कोर्ट का यह रुख इसलिए अहम है क्योंकि एक बड़ा वर्ग इसे बातचीत और सामंजस्य से ही सुलझाने की बात करता रहा है. गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने साल 2010 में विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था.



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