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रवीश कुमार का ब्लॉग: 'अगर नाम बदलने से हालात बदलते हैं तो अम्बानी रख लेता हूँ'

ऐसे पत्र बहुत आते हैं जिनमें 40 से 80 प्रतिशत विकलांगता की समस्या की बात होती है. सभी जगह पत्र भेजने और आजकल ट्वीट करने के बाद भी इनकी सुनवाई नहीं होती. इन पत्रों को पढ़िए. समाज में पीड़ा और अपमान की कितना परतें हैं.

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रवीश कुमार का ब्लॉग: 'अगर नाम बदलने से हालात बदलते हैं तो अम्बानी रख लेता हूँ'

सर सादर प्रणाम.

महोदय आप समय समय पर आम आदमी की समस्याओं के मुद्दों को उठाते रहे है जो काफी सराहनीय कार्य है.

मैं देवेश कुमार सैनी जसराना जिला फ़िरोज़ाबाद उत्तर प्रदेश का निवासी हूं.मैं दोनो पैरो से 80 % विकलांग हूं.

श्रीमान जी राजनीतिक पार्टियां तो कभी विकलंगो की सुनने वाली नही है क्योंकि इन्हें वोट बैंक चाहिये. मैंने pm,cm, दिव्यांग शशक्तिकरण विभाग को कई पत्र विकलांगो के रोजगार के लिए लिखे लेकिन आज तक कुछ नही हुआ.मेरे पत्र का आशय ये नही था कि मुझे कुछ भी दया के रूप में चाहिए मुझे तो बस अधिक अवसर चाहिए.

प्रधानमंत्री जी ने हमे नया नाम दिया दिव्यांग.अगर नाम बदलने से हालात बदलते तो मैं भी अपना नाम अम्बानी रख ले रहा हूं.

महोदय एक 80या 100 % विकलांग जिसे प्राइवेट सेक्टर में ज्यादा अवसर नही है वो 500रु मासिक पेंशन में अपना जीवन यापन कर सकता है.


मैंने 2011 में बीएड किया,प्राइमरी टेट पास किया,सीटेट पास किया,जूनियर टेट पास किया.सिर्फ मैंने नही ना जाने कितने विकलांग भाई बहिनो ने पास कर रखे है क्या इन्हे अलग से अवसर नही मिलना चाहिए.

महोदय आपने अपने शो में ना जाने कितने मुद्दों पर devate कराई है हम सभी विकलांग भी यही चाहते है कि आप उत्तर प्रदेश के विकलांग कल्याण मंत्री जी को बुलाकर हमारी बात रखे .आपकी बहुत बड़ी कृपा होगी.

महोदय सभी विकलांग आपके हमेशा आभारी रहेगे.

धन्यबाद

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प्रार्थी
देवेश कुमार सैनी
जसराना जिला फ़िरोज़ाबाद

मंत्री तो कभी आकर जवाब देंगे नहीं, आपमें से कोई उन तक पहुँचा दे. ऐसे पत्र बहुत आते हैं जिनमें 40 से 80 प्रतिशत विकलांगता की समस्या की बात होती है. सभी जगह पत्र भेजने और आजकल ट्वीट करने के बाद भी इनकी सुनवाई नहीं होती. इन पत्रों को पढ़िए. समाज में पीड़ा और अपमान की कितना परतें हैं.



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