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RBI ने विमल जालान कमेटी की सिफारिश मानी, सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मंजूरी दी

रिजर्व बैंक ने सोमवार को लाभांश और अधिशेष कोष के मद से 1.76 लाख करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने का सोमवार को निर्णय किया.

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RBI ने विमल जालान कमेटी की सिफारिश मानी, सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मंजूरी दी

पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया गया है

खास बातें

  1. RBI ने 1.76 लाख करोड़ रुपये ट्रांस्फर करने की दी मंजूरी
  2. जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया
  3. आरबीआई द्वारा उठाया गया बड़ा कदम
नई दिल्ली:

रिजर्व बैंक ने बिमल जालान समिति की सिफारिशों को अमल में लाते हुये सोमवार को रिकार्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये का लाभांश और अधिशेष आरक्षित कोष (Dividend and Surplus Reserve Fund) सरकार को ट्रांसफर करने का फैसला किया. इससे नरेंद्र मोदी सरकार को राजकोषीय घाटा बढ़ाये बिना सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में मदद मिलेगी. केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने 1,76,051 करोड़ रुपये सरकार को ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसमें 2018-19 के लिये 1,23,414 करोड़ रुपये का अधिशेष और 52,637 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रावधान के रूप में चिन्हित किया गया है. अतिरिक्त प्रावधान की यह राशि आरबीआई की आर्थिक पूंजी से संबंधित संशोधित नियमों (ईसीएफ) के आधार पर निकाली गयी है.  

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रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया है. समिति को यह तय करने को कहा गया था कि केंद्रीय बैंक के पास कितनी आरक्षित राशि होनी चाहिए. सरकार की तरफ से वित्त सचिव राजीव कुमार इस समिति में शामिल थे. समिति ने 14 अगस्त को अपनी रपट को अंतिम रूप दिया था. आरबीआई से प्राप्त राशि से सरकार को अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयासों में मदद मिलेगी. उल्लेखनीय है कि देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पांच वर्ष के निचले स्तर पर पहुंच गयी है.    

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार के लिये पिछले सप्ताह विभिन्न कदमों की घोषणा की. हालांकि, सरकार की कोशिश राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत पर सीमित रखने की है. इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच आरबीआई में अधिशेष राशि की सीमा तय करने को लेकर गतिरोध की स्थिति बन गयी थी. परिणामस्वरूप आरबीआई ने नवंबर, 2018 की अहम बोर्ड बैठक में रिजर्व बैंक की ईसीएफ की समीक्षा के लिए एक समिति के गठन का फैसला किया था. 

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हालांकि, समिति के गठन से पहले ही पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. रिजर्व बैंक 2013- 14 से ही अपनी खर्च योग्य आय में से 99 प्रतिशत राशि सरकार को देता आया है. सरकार को राजकोषीय घाटे को अंकुश में रखने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. 



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