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किसी युवा को लाने के लिए चंदर को हटाया गया : रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर

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किसी युवा को लाने के लिए चंदर को हटाया गया : रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर

रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर की फाइल तस्वीर

नई दि्ल्ली: डीआरडीओ प्रमुख के पद से अविनाश चंदर को अचानक हटाये जाने से उठे विवाद के बीच इस फैसले का बचाव करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को कहा कि उन्होंने ही सिफारिश की थी कि किसी युवा को पद पर होना चाहिए।

पर्रिकर ने कहा, 'मैंने ही सिफारिश की थी कि इस पद पर अनुबंध के आधार पर कोई व्यक्ति नहीं होना चाहिए। हमें वैज्ञानिक जगत में थोड़ी नौजवान पीढ़ी को पेश करना चाहिए।' संवाददाताओं के अनेक प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, 'इन वरिष्ठ पदों पर लोग अनुबंध के आधार पर नहीं होने चाहिए।'

चंदर का अनुबंध कल रात अचानक इस साल 31 जनवरी से समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। वह पिछले साल 30 नवंबर को 64 वर्ष की आयु होने पर सेवानिवृत्त हुए थे और उन्हें अगले साल 31 मई तक 18 महीने का सेवा विस्तार अनुबंध के आधार पर दिया गया था।

सरकार ने अभी तक उनके उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं की है।

जब पर्रिकर से पूछा गया कि अब रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) का प्रमुख कौन होगा तो उन्होंने कहा कि मौजूद लोगों में सबसे वरिष्ठ व्यक्ति इस पद को अस्थायी तौर पर संभालेगा। पर्रिकर ने कहा, 'बहुत सारे योग्य लोग हैं जिनमें से किसी को लाया जाना चाहिए। हम डीआरडीओ से किसी ऐसे सुपात्र को खोजेंगे जिसके पास विकास के लिए मजबूत इच्छाशक्ति हो।'

पर्रिकर ने एक तरफ तो कहा कि उन्होंने ही इस कदम की सिफारिश की थी, वहीं दूसरी तरफ जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी जानकारी के बिना चंदर को अचानक हटाना सही है तो उन्होंने दावा किया, 'मुझे जानकारी आप लोगों से मिली है। अखबार और टीवी से मिली है।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने कल रात चंदर का अनुबंध 31 जनवरी के प्रभाव से समाप्त करने को मंजूरी प्रदान की थी।

चंदर डीआरडीओ में रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव और डीआरडीओ के महानिदेशक थे। साथ ही वह रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार भी थे। वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद 1972 में डीआरडीओ के साथ जुड़े थे। वह बैलेस्टिक मिसाइल प्रणाली की अग्नि शृंखला के वास्तुकार हैं।

इस घटनाक्रम को प्रधानमंत्री मोदी की पिछले साल की गई उस टिप्पणी की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि डीआरडीओ में 'ढीला ढाला' रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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