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पंजाब: बोरवेल में फंसे दो साल के बच्चों को बचाने के लिए अंतिम चरण में पहुंचा अभियान

अधिकारियों ने बताया कि फतेहवीर मां-बाप की इकलौती संतान है. गुरुवार की शाम करीब चार बजे खेलने के दौरान वह बोरवेल में गिर गया था.

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पंजाब: बोरवेल में फंसे दो साल के बच्चों को बचाने के लिए अंतिम चरण में पहुंचा अभियान

बोरवेल मे गिरे बच्चे को निकालने की कोशिश में जुटा प्रशासन

नई दिल्ली:

पंजाब के संगरूर जिले में 150 फुट गहरे बोरवेल में गिरे दो साल के बच्चे फतेहवीर को बचाने के लिए चलाया जा रहा अभियान करीब 70 घंटे बाद लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. अधिकारियों ने बताया कि फतेहवीर मां-बाप की इकलौती संतान है. गुरुवार की शाम करीब चार बजे खेलने के दौरान वह बोरवेल में गिर गया था. करीब सात इंच चौड़ा यह बोरवेल कपड़े से ढका हुआ था. इस वजह से बच्चा बोरवेल को नहीं देख पाया और खेलते-खेलते इसमें गिर गया.  हालांकि, बच्चे की मां ने उसे बचाने का हर संभव कोशिश किया लेकिन वह इस तरह से फंसा गया था कि तमाम कोशिशों के बाद वह उसे निकाल नहीं पाई. इसके बाद घटना की सूचना प्रशासन को दी.

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सूचना मिलने के बाद ही प्रशासन ने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अपने अभियान की शुरुआत की. संगरूर के उपायुक्त घनश्याम थोरी ने बताया कि बचाव कार्य चल रहा है और यह अपने अंतिम चरण में है. हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लेंगे. उन्होंने बताया कि बच्चा बोरवेल में गिरते ही बेहोश हो गया था, इसलिए उसे खाना या पानी नहीं दिया जा सका. उसे ऑक्सीजन दी जा रही है. कैमरे के माध्यम से बच्चे की स्थिति पर नजर रख रहे अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बच्चे के शरीर में कुछ हरकत देखी है. थोरी ने कहा कि बचाव कार्य उनकी निगरानी में हो रहा है. एनडीआरएफ ने बोरवेल में फंसे लोगों को निकालने में विशेषज्ञता रखने वाले एक अधिकारी को भेजा है. बता दें कि बोरवेल में बच्चे के गिरने का यह कोई पहला मामला नहीं है.

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इससे पहले आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में खुले पड़े एक बोरवेल में दुर्घटनावश गिरे दो साल के एक बच्चे को एनडीआरएफ और अन्य दलों ने 10 घंटे तक चले अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया था. बच्चे का गवर्नमेंट जनरल अस्पताल में इलाज के बाद छोड़ा गया था. पीड़ित चंद्रशेखर को देर रात ढाई बजे बोरवेल से निकाला गया.

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अभियान की सफलता पर दी बधाई
एनडीआरएफ के अधिकारी ने बताया था कि 30 फुट के इस बोरवेल में बच्चा 15 फुट पर फंसा हुआ था. एनडीआरएफ ने 22 फुट पर एक तख्ता फंसाया था, जिससे की बच्चा नीचे न फिसले. अधिकारी ने बताया कि बोरवेल में एक मोबाइल भी लटका दिया गया था, जिससे बचाव अभियान के दौरान बच्चा अपने माता-पिता की आवाज सुन सके. उपायुक्त मधुसूदन रेड्डी के नेतृत्व में एनडीआरएफ का 40 सदस्यीय दल बचाव अभियान में जुटा था. आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (गृह) एन चिनाराजप्पा ने एनडीआरएफ, पुलिस और अन्य दलों को अभियान की सफलता पर बधाई दी थी.

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बच्चे की हालत स्थिर
उन्होंने कहा था कि ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए राज्य में खुले पड़े सभी बोरवेलों को बंद करने के लिए कदम उठाए जाएंगे. अस्पताल में बच्चे से मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री के. श्रीनिवास राव ने कहा था कि बच्चे की हालत अब स्थिर है. 

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