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उम्‍मीद है, पार्टी बदलने संबंधी ज्‍योतिषी की भविष्‍यवाणी सही नहीं होगी : शत्रुघ्‍न

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उम्‍मीद है, पार्टी बदलने संबंधी ज्‍योतिषी की भविष्‍यवाणी सही नहीं होगी : शत्रुघ्‍न

शत्रुघ्‍न सिन्‍हा (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: भाजपा सांसद शत्रुघ्‍न सिन्हा ने सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबित किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने आजाद का निलंबन वापस लिए जाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे लोगों में 'अच्छा संदेश' नहीं गया है क्योंकि 'धारणा' यह है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे। सिन्हा कई मुद्दों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों की आलोचना करते रहे हैं।

शीर्ष नेतृत्व को अस्पष्ट संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि नेतृत्व ने ऐसी गलतियों के लिए उन्हें दंडित करने का फैसला किया जो उन्होंने की ही नहीं हैं तो यह उन्हें एक ज्योतिषी की उस भविष्‍यवाणी को याद दिलाएगा कि वह अपनी पार्टी बदल सकते हैं। उन्‍होंने हंसते हुए कहा, 'मैं उम्मीद, कामना और प्रार्थना करता हूं कि यह सच नहीं हो।'

कीर्ति ईमानदार पिता की ईमानदार संतान
इंटरव्‍यू में सिन्हा ने आजाद को 'एक ईमानदार पिता की ईमानदार संतान' करार दिया और लालकृष्ण आडवाणी सहित वरिष्ठ नेताओं का समर्थन किया जिन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं । सिन्हा ने कहा, 'मैं इसे बहुत दुर्भाग्यूपर्ण मानता हूं कि आजाद, एक ईमानदार पिता की एक ईमानदार संतान, को इस तरह निलंबित कर दिया गया। आम धारणा क्या बनी है ? कि वह भ्रष्टाचार के बारे में बात कर रहे थे।' कीर्ति के पिता दिवंगत भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री थे।

आत्‍मकथा 'एनीथिंग बट खामोश' का आज आडवाणी करेंगे विमोचन
अभिनेता से नेता बने सिन्हा ने कहा कि वह पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा लिए गए फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन कहा कि 'दुख या खुशी महसूस करना पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं है।' सिन्हा के पार्टी बदलने के बारे में एक ज्योतिषी की भविष्यवाणी का जिक्र ओम बुक्स इंटनरेशनल द्वारा प्रकाशित उनकी आत्मकथा 'एनीथिंग बट खामोश' में किया गया है । किताब का विमोचन कल आडवाणी करेंगे जिन्हें सिन्हा ने अपना मित्र, दार्शनिक, मार्गदर्शक, गुरू और सच्चे अर्थ में नेता बताया।

लगा था अमित शाह मुझे बुलाएंगे पर ऐसा नहीं हुआ
सिन्हा ने कहा कि यह 'दुर्भाग्यपूर्ण' था कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अनेक प्रयासों के बावजूद वह पार्टी प्रमुख अमित शाह से मिलने में सफल नहीं हुए । उन्होंने कहा, 'बिहार में जो कुछ हो रहा था उससे मुझे दुख हुआ। मुझे नहीं बुलाया गया, आमंत्रित नहीं किया गया..उनके पार्टी प्रमुख होने के चलते मैंने उम्मीद और कामना की थी कि वह मुझे संरक्षण देंगे। वह मुझे बुलाएंगे और बात करेंगे । ऐसा नहीं हुआ।'  सिन्हा से जब यह पूछा गया कि वह मुखर होकर विचार व्यक्त करते हैं जिसे पार्टी ने ठीक नहीं माना है, उन्होंने कहा कि साफ बोलना उनकी आदत है और उनका आधार हमेशा सच रहा है, जो उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी से सीखा है ।

मुझे आडवाणी, यशवंत और जोशी का आशीर्वाद
उन्होंने कहा, 'मैंने कहा है कि मेरे लिए भाजपा हमेशा पहली और अंतिम पार्टी रही है..मैं किसी मांग, किसी कमान, किसी शिकायत के बिना पार्टी में हूं और मेरी कोई चाहत नहीं है। मेरे मन में किसी के प्रति कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है।' सिन्हा ने कहा कि उनके पास आडवाणी, यशवंत सिन्हा और मुरली मनोहर जोशी का आशीर्वाद है। शांता कुमार के साथ ही इन तीनों नेताओं ने बिहार में भाजपा की बड़ी हार के बाद दीपावली की पूर्व संध्या पर पार्टी नेतृत्व पर हमला बोला था तथा आजाद के निलंबन के एक दिन बाद कुछ हफ्ते पहले दोबारा मुलाकात की थी। इन नेताओं की नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा कि वे पार्टी को लोकसभा में दो सीटों से 200 सीटों तक ले गए और उन्हें चिंता व्यक्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, 'वे पार्टी के व्यापक हित में सोच रहे हैं।' शाह के बारे में उनका मत पूछे जाने पर सिन्हा ने कहा, 'मैं उन्हें शायद ही जानता हूं।' उन्होंने कहा कि वाजपेयी-आडवाणी युग में उन्होंने 'काफी कुछ सीखा तथा अधिक सहज महसूस किया।'

'आप' की ओर से संपर्क किए जाने की पुष्टि की
उनकी आत्मकथा में कहा गया है कि 2014 में भाजपा के भीतर की राजनीति ने उन्हें लगभग 'टूटने के कगार और लगभग किसी विपक्षी पार्टी की ओर देखने के स्तर तक पहुंचा दिया था।' भारती एस प्रधान द्वारा लिखी गई किताब में उन्होंने पुष्टि की है कि 'आप के लोगों ने मुझसे संपर्क किया' और वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा राजद प्रमुख लालू प्रसाद के साथ अपने निजी समीकरणों का भी वर्णन करते हैं।

शाह पर साधा निशाना, मोदी सरकार की सराहना की
किताब में उन्होंने शाह पर भी यह कहते हुए करारा हमला बोला है कि उन्होंने 'बड़े आत्मविश्वास' से भविष्यवाणी की थी कि पार्टी दो तिहाई बहुमत से जीतेगी । उन्होंने शाह के बारे में कहा, 'शायद यह उनकी आदत बन गई थी क्योंकि उन्होंने यही चीज दिल्ली में भी कही थी। लेकिन आखिर में हम दो या तीन सीटें ही जीत पाए।' शत्रुघ्न ने कहा कि मोदी सरकार सही दिशा में काम कर रही है और प्रधानमंत्री लोगों की उम्मीदों तथा आकांक्षाओं के प्रतीक हैं।

 


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