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गोवा कांग्रेस में कलह : MLA विश्वजीत राणे ने दिया इस्तीफा, पर्रिकर यहां से लड़ सकते हैं चुनाव!

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गोवा कांग्रेस में कलह : MLA विश्वजीत राणे ने दिया इस्तीफा, पर्रिकर यहां से लड़ सकते हैं चुनाव!

कांग्रेस विधायक विश्वजीत राणे...

खास बातें

  1. विश्वास मत के दौरान विश्वजीत राणे ने वोटिंग का बहिष्कार किया
  2. विश्वजीत ने विधायकी और कांग्रेस की सदस्यता से दिया इस्तीफा
  3. उनके द्वारा खाली सीट पर मनोहर पर्रिकर लड़ सकते हैं चुनाव
पणजी: गोवा विधानसभा में मुख्‍यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बहुमत साबित करने के साथ ही कांग्रेस में बगावत खुलकर सतह पर आ गई है. कांग्रेस के असंतुष्‍ट विधायक विश्‍वजीत राणे ने विधायकी और पार्टी की सदस्‍यता से इस्‍तीफा देने का ऐलान कर दिया है. उन्‍होंने सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस के सरकार नहीं बना पाने की पार्टी की विफलता का ठीकरा भी शीर्ष नेतृत्‍व पर फोड़ा. सूत्रों के मुताबिक इस इस्‍तीफे से खाली हुई सीट पर मुख्‍यमंत्री मनोहर पर्रिकर चुनाव लड़ सकते हैं.

उल्‍लेखनीय है कि गुरुवार को मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने 22 के मुकाबले 16 विधायकों से आसानी से विश्वासमत हासिल किया और इस दौरान कांग्रेस विधायक विश्वजीत राणे ने वोटिंग का बहिष्कार किया और बाहर चले गए. उल्‍लेखनीय है कि हालिया चुनावों में बीजेपी 13 सीटों पर ही जीत पाई थी. कांग्रेस पार्टी के सरकार बनाने में विफल रहने के बाद कांग्रेस पार्टी में कई विधायक नाराज बताए जा रहे हैं. इनमें विश्वजीत राणे से खुलेआम पार्टी प्रभारी दिग्विजय सिंह के विफल होने का आरोप लगाया था और अपनी नाराजगी सार्वजनिक की थी.

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अब इस्‍तीफा देने के बाद हालांकि राणे ने बीजेपी में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया है लेकिन कहा है कि अभी उन्‍होंने कोई फैसला नहीं किया है. हालांकि सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक हलकों के जानकार यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस विधायक विश्वजीत राणे के पिता और पांच बार कांग्रेसी सरकार के मुखिया रहे प्रताप सिंह राणे राज्यपाल बन सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक पिता की सीट खाली होने पर उस जगह से विश्‍वजीत चुनाव लड़ सकते हैं. इसको गोवा में बीजेपी के गेम प्‍लान के रूप में देखा जा रहा है.

उल्लेखीय है कि आज विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को बहुमत साबित करना था. कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह ऐसा नहीं कर पाएंगे लेकिन इसके उलट उन्‍होंने आसानी से 40 सीटों वाली विधानसभा में 22 विधायकों का समर्थन हासिल कर बहुमत जुटा लिया.


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