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बिहार : महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर जेडीयू ने कसा तंज, राजद ने भी दिया जवाब

जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा है कि 'महागठबंधन में लोकसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारा इतना आसान नहीं है.'

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बिहार : महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर जेडीयू ने कसा तंज, राजद ने भी दिया जवाब
नई दिल्‍ली:

बिहार में लोकसभा के चुनावों के लिए एनडीए में सीटों का बंटवारा हो चुका है लेकिन महागठबंधन में सीटों को लेकर क्‍या स्थिति होगी, इसको लेकर कुछ भी स्‍पष्‍ट नहीं हो रहा है. अब जेडीयू ने महागठबंधन पर निशाना साधा है. जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा है कि 'महागठबंधन में लोकसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारा इतना आसान नहीं है.' उन्होंने कहा कि महागठबंधन के घटक दल के नेताओं को ना केवल जेल में बंद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जी से चर्चा करने के लिए जेल जाना होगा बल्कि उन्हें अपनी जमीन या संपत्ति देने के लिए एग्रीमेंट करवाना होगा.'

नीरज कुमार ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि लालू प्रसाद जी घटक दल के प्रमुख दल राजद के अध्यक्ष हैं और इनके राजनीतिक जीवन का इतिहास रहा है कि जब वे रेल मंत्री थे तब भी उन्होंने होटल ठेका देने के लिए पटना में जमीन लिया था. यही नहीं रेलवे में नौकरी देने के नाम पर गरीब लोगों से भी जमीन लिखवाई गई.


जदयू नेता ने आगे कहा कि सांसद और विधायक के लिए टिकट देने के लिए भी जमीन लिखवाने का उनका इतिहास रहा है. ऐसे में आने वाले चुनाव में टिकटार्थियों को तथा महागठबंधन में शामिल घटक दलों के नेताओं को भी जमीन और संपत्ति का एग्रीमेंट तैयार कर उनसे मिलना होगा.

नीरज ने दावा किया कि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा खरमास के कारण नहीं बल्कि संपत्ति और जमीन की सौदेबाजी के लिए रुका हुआ है. मेरी सलाह है कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी जी, रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा सीट बंटवारे के लिए जब जेल में बंद लालू से मिलने जाएंगे तब अपनी संपत्ति और जमीन का ब्योरा लेकर भी जाएंगे, जिससे वहीं एग्रीमेंट कर सकें.

जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार के आरोपों के जवाब में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर नवल किशोर ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि 'जदयू के नेता और प्रवक्ताओं दोनों की आजीविका लालू विरोध पर ही टिकी है. नीतीश जी एक परजीवी नेता के रूप में जाने जाते हैं और वामपंथ से लेकर दक्षिणपंथ तक हर विचारधारा को अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया. नीतीश जी ने 2005 से लगातार तीसरी दफा विधान परिषद के माध्यम से षड्यंत्रकारी राजनीति कर रहे हैं और एक बार भी विधानसभा जाने की हिम्मत नहीं दिखाई. खुद नीरज जी महागठबंधन 2015 के दौरान बुरी तरह हारे.'

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उन्‍होंने कहा, 'नीतीश जी ने तो महागठबंधन जनादेश का भी सौदा कर डाला. संघयुक्त होने और मोदी-शाह के समक्ष घुटने टेकने के बाद ही तो दो लोकसभा सीट की औकात रखने वाले दल को 17 सीट का मलाई चटाया. छवि, शुचिता और सुशासन के नाटक करने वाले ने पूरे बिहार को बलात्कार, हिंसा, दंगा और कुशासन के गड्ढे में धकेल दिया. प्रवक्ता के विचार बेहद स्तरहीन और सतही हैं. अवसरवाद के पितामह नीतीश जी ने तो अपने होने और नहीं होने का फर्क ही समाप्त कर दिया है.'

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