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परिवारवाद की राजनीति को लेकर शिवानंद तिवारी ने साधा बीजेपी पर निशाना, कहा- शोर मचा रहे हैं सत्ताधारी दल के लोग

शिवानंद तिवारी ने कहा कि संभावित चुनौती को खत्म करने के लिए शोर मचाया जा रहा है.

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परिवारवाद की राजनीति को लेकर शिवानंद तिवारी ने साधा बीजेपी पर निशाना, कहा- शोर मचा रहे हैं सत्ताधारी दल के लोग
नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से लगातार ऐसा दावा किया जा रहा है कि उसने परिवारवाद की राजनीति को खत्म कर दिया है.  पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने  शनिवार को चुनाव परिणामों में मिली जीत को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा था कि 2019 के जनादेश ने परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण को राजनीति से बाहर निकाल दिया है. ऐसे में राष्ट्रीय जनता दल (RJD)के नेता शिवानंद तिवारी ने परिवारवाद की राजनीति को लेकर बीजेपी पर हमला किया है. उन्होंने फेसबुक पर लिखे पोस्ट में कहा कि इस चुनाव में भी परिवारवाद का बोलबाला रहा तभी तो रामविलास पासवान के बेटे, नवीन पटनायक, स्टालिन और जगन रेड्डी ने  चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की है. 

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शिवानंद ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, 'कहा जा रहा है कि इस चुनाव का संदेश परिवारवाद की राजनीति के ख़िलाफ़ है. परिवार की राजनीति अब चलने वाली नहीं है. लेकिन अभी संपन्न चुनावों में भी देखा जाए तो जनता ने परिवार की राजनीति को ख़ारिज नहीं किया है. अगर ऐसा होता तो राम विलास पासवान जी का परिवार थोक भाव में चुनाव कैसे जीत जाता !
उड़ीसा में नवीन पटनायक ने पांचवीं बार मुख्यमंत्री बन कर रिकॉर्ड बनाया है. नवीन पटनायक के पिता स्वर्गीय बीजू पटनायक देश के बड़े नेता थे. उनके मृत्यु के बाद नवीन पटनायक विदेश से आकर सीधे मुख्यमंत्री बन गए और आज तक बने हुए हैं. 

तमिलनाडु में स्वर्गीय करुणानिधि जी के पुत्र स्टालिन वहां की लोकसभा की आधी से अधिक सीट जीत गए. आंध्र प्रदेश में तो राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी की आंधी ने लोक सभा और साथ हुए विधान सभा चुनाव में चंद्र बाबू नायडू को हवा में उड़ा दिया. इसलिए इस चुनाव ने परिवारवाद की राजनीति को ख़ारिज कर दिया है यह कहना तथ्य के बिलकुल विपरीत है. ऐसा शोर सत्ताधारी दल के लोग मचा रहे हैं. नरेंद्र मोदी जी यही शोर राहुल गांधी के ख़िलाफ़ मचा रहे हैं और ऐसा ही शोर बिहार में तेजस्वी के विरूद्ध मचाया जा रहा है. क्योंकि भविष्य में चुनौती इन्हीं से मिल सकती है. इसलिए उस संभावित चुनौती को समाप्त करने के लिए सोची समझी रणनीति की तरह यह शोर मचाया जा रहा है. लेकिन इस शोर के पीछे जो साज़िश है उसको लोग समझ रहे हैं.'

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बता दें इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 2014 (282) से ज्यादा (303) सीटें मिली हैं. इस बार भाजपा के नेतृत्व में एनडीए ने लोकसभा की 542 सीटों में से 351 पर जीत दर्ज की है. 



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