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घायलों को डॉक्टर के पास ले गया था, कोर्ट ने ग्रामीण सेवा के ड्राइवर की सजा कम की

अदालत ने ग्रामीण सेवा के चालक को रिहा करते हुए कहा कि न्यायिक प्रणाली सुधारवादी पद्धति पर आधारित होने के कारण प्रदीप तंवर (47) खुद को सुधारने का एक अवसर पाने का हकदार है.

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घायलों को डॉक्टर के पास ले गया था, कोर्ट ने ग्रामीण सेवा के ड्राइवर की सजा कम की

खास बातें

  1. घायलों को अस्पताल ले गया था चालक
  2. कोर्ट ने कहा-सुधरने का अधिकार
  3. ग्रामीण सेवा से लगी थी टक्कर
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सड़क दुर्घटना में दो व्यक्तियों को घायल करने वाले चालक द्वारा ही घायलों को डॉक्टर के पास ले जाने के तथ्य के मद्देनजर इस घटना के लिए दोषी व्यक्ति की दो माह की सजा रद्द कर दी है. अदालत ने ग्रामीण सेवा के चालक को रिहा करते हुए कहा कि न्यायिक प्रणाली सुधारवादी पद्धति पर आधारित होने के कारण प्रदीप तंवर (47) खुद को सुधारने का एक अवसर पाने का हकदार है. विशेष न्यायाधीश सविता राव ने कहा कि दोषी खुद घायलों को नजदीक स्थित एक डिस्पेंसरी ले गया था. इस तथ्य पर गौर करते हुए कि हमारी न्यायिक प्रणाली सुधारवादी पद्धति पर आधारित है, इसिलए वह सुधरने का एक अवसर प्राप्त करने का हकदार है. न्याय तभी होगा जब उसे एक साल के प्रोबेशन पर रिहा किया जाए.

अभियोजन पक्ष के अनुसार 18 अक्तूबर 2013 को शिकायतकर्ता अनूप सिंह और कुलदीप दक्षिण दिल्ली स्थित फतेहपुर बेरी के पास अपने घर जा रहे थे जब एक ग्रामीण सेवा ने उन्हें टक्कर मार दी. दोषी उस समय ग्रामीण सेवा चला रहा था.

न्यायाधीश ने प्रदीप को शांति एवं अच्छा व्यवहार बनाए रखने का निर्देश देते हुए प्रोबेशन पर एवं 10,000 रुपये के बॉन्ड पर रिहा कर दिया. अदालत ने उसे दोनों पीड़ितों को 5000 रपए बतौर मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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