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UP राज्यसभा चुनाव : BSP-SP गठजोड़ को 'मात' दे सकता है BJP का यह नया पैंतरा

उत्‍तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है और मैदान में दस सीटों के लिए 11 उम्मीदवार के आने से चुनाव और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

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UP राज्यसभा चुनाव : BSP-SP गठजोड़ को 'मात' दे सकता है BJP का यह नया पैंतरा

अमित शाह, सीएम योगी और पीएम मोदी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. यूपी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के दांव ने नया समीकरण बनाया.
  2. बसपा-सपा को मात देने के लिए अमित शाह का मास्टर प्लान
  3. बीजेपी 8 सीटों पर 9 उम्मीदवार उतार चुकी है.
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है और अब मैदान में कुल 11 उम्मीदवार हैं. एक सीट का समीकरण कुछ इस तरह से बना है, जिसकी वजह से यह चुनाव भी काफी रोचक हो गया है. इन 11 उम्मीदवारों में से BJP की ओर से 9 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि उनके सिर्फ 8 प्रत्याशियों के जीतने की गारंटी है. वहीं समाजवादी पार्टी और बसपा की तरफ से एक-एक प्रत्याशी मैदान में है. राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी की 8 सीट पक्की है, वहीं सपा की नौंवीं सीट पक्की है, जहां से जया बच्चन का जीतना पूरी तरह तय है. मगर जो दसवीं सीट है, दरअसल, महाभारत उसी के लिए है. 

दसवीं सीट के लिए भाजपा की दावेदारी ने इस चुनाव को न सिर्फ रोमांचकारी बना दिया है, बल्कि उसने पहले के समीकरण को भी ध्वस्त कर दिए हैं. दसवीं सीट के लिए बसपा की ओर से भीमराव अंबेडकर मैदान में हैं, जिन्हें सपा का समर्थन प्राप्त है. बीजेपी की ओर से राज्‍यसभा के लिए नामांकन के दाखिल करने वाले नेता हैं, केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली, जनसंघ के उम्मीदवार महेश चंद्र शर्मा, बीजेपी के डॉ. अनिल जैन, अशोक वाजपेयी, कांता कर्दम, विजय पाल सिंह तोमर, डॉ. हरनाथ सिंह यादव, सकलदीप राजभर और जीवीएल नरसिम्हा राव. वहीं सपा की ओर से जया बच्चन और बसपा की ओर से भीमराव अंबेडकर.

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ध्यान देने वाली बात है कि बीजेपी पहले 11 उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की बात कह रही थी, मगर चुनाव में उसने नौ उम्मीदवारों को ही रखने का फैसला किया. खास बात है कि एक राज्‍यसभा सीट पर जीत के लिए औसत 37 विधायकों के वोट की जरूरत होती है. इस लिहाज से देखा जाए तो यूपी की आठ सीटों पर वोट करने के बाद बीजेपी के पास 8 विधायकों के अतिरिक्त मत बच रहे हैं और उसे जीत के लिए सिर्फ नौ और मतों की जरूरत होगी.

अभी यूपी में बीजेपी के पास 311 विधायक हैं. बिजनौर के नूरपुर के विधायक लोकेंद्र सिंह के निधन से एक संख्या घटी है. वहीं बीजेपी सदन में निर्दलीय रघुराज प्रताप सिंह और अमन मणि त्रिपाठी तथा निषाद के विजय मिश्र के वोटों पर अपना दावा करती है. विधानसभा में सहयोगी दलों को मिलाकर बीजेपी के पास 324 विधायकों का समर्थन हासिल है. 

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वहीं जया बच्चन के मत आवंटित करने के बाद समाजवादी पार्टी के पास दस वोट बच रहे हैं. बसपा के 19, सपा के दस, कांग्रेस के सात और रालोद के एक वोट को मिलाकर कुल 37 हो रहे हैं. जो जीत के आंकड़े के बराबर हैं. मगर सपा सांसद नरेश अग्रवाल के बीजेपी में शामिल होने के बाद से समीकरण बदल गए हैं. सपा महासचिव रहे नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल सपा के विधायक हैं. ऐसे में नितिन अग्रवाल बीजेपी को समर्थन दे सकते हैं. 

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गौरतलब है कि 2016 के विधान परिषद और राज्यसभा के चुनाव में भी बीजेपी ने विपक्ष के वोटों पर सेंध लगाई थी. ऐसे में सपा, बसपा और कांग्रेस के विधायक अगर क्रॉस वोटिंग करते हैं तो नौवीं सीट पर बीजेपी चुनाव जीत सकती है. बीजेपी ने निर्दलीय उम्‍मीदवार अनिल अग्रवाल को समर्थन देने की घोषणा की है. 

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