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बोफोर्स घोटाले के चलते कांग्रेस छोड़ने वाले सत्‍यपाल मलिक को मोदी सरकार ने बनाया जम्‍मू-कश्‍मीर का गवर्नर

जम्मू-कश्मीर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है और वहां दस साल से राज्यपाल रहे एनएन वोहरा को हटा दिया गया है. उनकी जगह अब तक बिहार के राज्यपाल सतपाल मलिक ने ली है.

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बोफोर्स घोटाले के चलते कांग्रेस छोड़ने वाले सत्‍यपाल मलिक को मोदी सरकार ने बनाया जम्‍मू-कश्‍मीर का गवर्नर

जम्मू-कश्मीर के नए राज्‍यपाल बनाए गए सतपाल मलिक

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है और वहां दस साल से राज्यपाल रहे एनएन वोहरा को हटा दिया गया है. उनकी जगह अब तक बिहार के राज्यपाल सतपाल मलिक ने ली है. सतपाल मलिक की जगह बिहार का राज्‍यपाल लालजी टंडन को बनाया गया है. जम्‍मू कश्‍मीर का राज्‍यपाल नियुक्‍त होने पर NDTV इंडिया से बोले सतपाल मलिक ने कहा कि कश्‍मीरी नेताओं से मेरे निजी संबंध हैं. पीएम की सोच पर अमल करना है और लोगों का भरोसा जीतना है. कश्‍मीर की जनता पर मुझे पूरा भरोसा है.

सतपाल मलिक जम्‍मू-कश्‍मीर के राज्‍यपाल बनाए गए

विभिन्न दलों से जुड़े रहे मलिक ने अपने छात्र दिनों में मेरठ विश्वविद्यालय में सोशलिस्ट नेता के तौर पर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. बाद के दिनों में वह भाजपा के उपाध्यक्ष बने और पिछले साल बिहार के राज्यपाल नियुक्त किये गए. अपने लंबे राजनीतिक करियर में मलिक भारतीय क्रांति दल, लोक दल, कांग्रेस और जनता दल और भाजपा में रहे. वर्ष 1974 में उत्तर प्रदेश के बागपत से चौधरी चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से वह विधायक बने. वह 1984 में कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी से राज्यसभा सदस्य बने लेकिन बोफोर्स घोटाले की पृष्ठभूमि में तीन साल बाद इस्तीफा दे दिया. वह 1988 में पाला बदलकर वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल में शामिल हो गए और 1989 में पार्टी के टिकट पर अलीगढ़ से सांसद बने.

वर्ष 2004 में मलिक भाजपा में शामिल हुए. चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह से उन्हें लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. चार अक्टूबर 2017 को बिहार के राज्यपाल का पद संभालने के पहले वह भाजपा के किसान मोर्चा के प्रभारी थे. मलिक केंद्रीय संसदीय कार्य और पर्यटन राज्यमंत्री रह चुके हैं. वह केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं.

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पूर्व सांसद और भाजपा के उपाध्यक्ष रहे 71 वर्षीय सत्यपाल मलिक कई अहम संसदीय समितियों के सदस्य और अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. सत्यपाल मलिक दो बार राज्यसभा सांसद और एक बार लोकसभा सांसद (1989 से 1990) रह हैं. इतना ही नहीं, 1974 से 1977 के बीच वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रहे हैं. सत्यपाल मलिक ने मेरठ यूनिवर्सिटी से बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई की. 

छात्र राजनीति से बाहर निकल कर सत्यपाल मलिक विधायक बने, फिर अलीगढ़ से सांसद चुने गये. बिहार के नये राज्यपाल सत्यपाल मलिक की सियासी पारी की शुरुआत मेरठ कॉलेज से हुई थी. सत्यपाल मलिक मेरठ कॉलेज के दो बार छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे थे. 

बिहार के राज्यपाल नियुक्त होने के बाद सत्यपाल मलिक ने कहा कि वह जिस पद पर जा रहे हैं, उस पद का महत्व बहुत है, क्योंकि मुझसे पहले जो शख्स इस पद पर थे, वे आज राष्ट्रपति हैं. राज्यपाल सत्यपाल मलिक का जन्म यूपी के बागपत जिले के हिसवाड़ा में सामान्य किसान परिवार में हुआ. उन्होंने पड़ोस के ढिकौली गांव से इंटर तक की पढ़ाई की. वह 21 अप्रैल, 1990 से 10 नवंबर, 1990 तक केंद्रीय पर्यटन एवं संसदीय राज्यमंत्री रह चुके हैं. इसके पहले वे 1980-84 और 1986-89 तक राज्यसभा सदस्य और 1989-90 तक लोकसभा सांसद के साथ 1974-77 तक यूपी विधानसभा के सदस्य थे. वे लोकदल और जनता दल के सदस्य रहे. बाद में भाजपा में शामिल हुए और इसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुए. 


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