सत्यम घोटाला : राजू के परिवार, अन्य को अपराध की कमाई के 3300 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश

सत्यम घोटाला : राजू के परिवार, अन्य को अपराध की कमाई के 3300 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश

बीे रामलिंग राजू (फाइल फोटो)

मुंबई:

करीब सात साल पुराने सत्यम घोटाले में गुरुवार को एक नया आदेश जारी करते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मुख्य अभियुक्त बी रामलिंग राजू से संबद्ध 10 इकाइयों को घोटाले से कमाए गए 1,800 करोड़ रुपये लौटाने को कहा है। इनमें राजू की मां, भाई और पुत्र भी शामिल हैं। इसके अलावा इन इकाइयों को अवैध कमाई पर करीब 1,500 करोड़ रुपये का ब्याज भी देना होगा। यह जुर्माना 7 जनवरी, 2009 से लगाया गया है। उसी दिन सत्यम कंप्यूटर्स के संस्थापक एवं तत्कालीन चेयरमैन राजू ने कंपनी में लंबे समय से घोटाले की बात स्वीकार की थी।

भेदिया कारोबार के लिए ताजा जुर्माने से पहले सेबी ने पिछले साल जुलाई में भी वसूली का आदेश दिया था। इसमें नियामक ने राजू और चार अन्य को 14 साल के लिए बाजार से प्रतिबंधित करते हुए उन्हें 1,849 करोड़ रुपये की अवैध कमाई ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया था। यह आदेश रामलिंग राजू, उनके भाई बी रामा राजू (सत्यम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक), वाडलामणी श्रीनिवास (पूर्व सीएफओ), जी रामकृष्ण (पूर्व उपाध्यक्ष) और वी एस प्रभाकर गुप्ता (पूर्व प्रमुख आंतरिक आडिट) के खिलाफ दिया गया था।

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सेबी ने आज के आदेश में राजू, उनके दो भाइयों तथा अन्य लोगों और प्रवर्तक परिवार से जुड़ी कंपनियों की व्यक्तिगत देनदारी तय की है। जिन लोगों के खिलाफ यह नया आदेश पारित किया गया है उनमें एसआरएसआर होल्डिंग्स (राजू के भाइयों द्वारा नियंत्रित), आईएलएंडएफएस इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन (पुराना नाम मेटास इन्फ्रा, राजू और उनके दो पुत्रों द्वारा नियंत्रित), राजू की मांग बी अप्पलानरासम्मा और राजू के दो पुत्रों तेजा राजू और रामा राजू जूनियर, उनके भाई सूर्यनारायण राजू, बी झांसी रानी (सूर्यनारायण की पत्नी), चिंतलापति श्रीनिवास (सत्यम के तत्कालीन निदेशक) और उनके पिता अनिराजू चिंतलापति (अब मृतक) के अलावा चिंतलापति होल्डिंग्स प्राइवेट लि. शामिल हैं।

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आईएलएंडएफएस इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन के बारे में सेबी ने कहा कि यह न तो सत्यम कंप्यूटर्स और मेटास में भेदिया थी और न ही उसे बिना प्रकाशन वाली सूचनाएं थीं। ऐसे में उस पर किसी तरह की रोक लगाने की कार्रवाई नहीं की गई है।