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सिख दंगा मामला : बंद किए गए मामलों की जांच के लिए SC ने गठित किया दो रिटायर जजों का पैनल

ये पैनल रिकार्ड देखने के बाद ये तय करेगा कि केस बंद करने का फैसला सही है या नहीं.  पैनल शुरुआत में ही बंद किए गए 199 केसों के अलावा 42 अन्य मामलों की फाइलों को भी देखेगा.

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सिख दंगा मामला : बंद किए गए मामलों की जांच के लिए SC ने गठित किया दो रिटायर जजों का पैनल

फाइल फोटो

खास बातें

  1. बंद किए केसों की होगी जांच
  2. SC ने गठित किया पैनल
  3. कानपुर के पी़ड़ितों को न्याय दिलाने की मांग
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट  ने एसआईटी द्वारा छंटनी के बाद बंद किए गए केसों की छानबीन के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो रिटायर जजों के सुपरवाइजरी  पैनल का गठन किया है. ये पैनल रिकार्ड देखने के बाद ये तय करेगा कि केस बंद करने का फैसला सही है या नहीं.  पैनल शुरुआत में ही बंद किए गए 199 केसों के अलावा 42 अन्य मामलों की फाइलों को भी देखेगा. सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया है.सुप्रीम कोर्ट 28 नवंबर को करेगा सुनवाई. 

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वहीं कानपुर में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर को करेगा. पिछली सुनवाई में अदालत ने एसआइटी से जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की हामी भरते हुए इस याचिका को सिख दंगों के मुख्य मामले के साथ जोड़ने का फैसला किया था. याचिका में कहा गया है कि कानपुर में दंगों के दौरान 127 लोगों की मौत हुई थी. ज्यादातर मामले सबूत के अभाव में बंद किये जा चुके हैं. याचिका में मुआवजे की भी बात की गई है.

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आपको बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके और अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी के अध्यक्ष जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल ने सुप्रीमकोर्ट में यह याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली राजधानी है इसलिए उसका मामला सबकी निगाह में आ गया लेकिन कानपुर में भी 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में 127 लोगों की मौत हुई थी. पूरे उत्तर प्रदेश में इन दंगों की कुल 2800 एफआइआर दर्ज हुईं लेकिन ज्यादातर मामले सबूतों के अभाव में बंद कर दिये गए. उन्होंने कहा कि पीड़ित 33 वर्ष से न्याय के लिए भटक रहे हैं.

Video : सिख दंगा मामले में प्रदर्शन

क्या कहा गया है याचिका में
1-  याचिका में कहा गया है कि ये मामला पुलिस और सरकारी तंत्र के अमानवीय क्रूर और लापरवाह रवैये से जुड़ा है. यहां तक कि जिस क्षेत्र में लोग मारे गए वहां के संबंधित पुलिस थाने कहते हैं कि यहां कोई मौत नहीं हुई, न ही दंगा हुआ या संपत्ति लूटी गई आरटीआई में इन थानों से शून्य रिपोर्ट की बात कही गई है.
2- गोविन्द नगर और नौबस्ता पुलिस थाने के क्षेत्र में जहां सबसे ज्यादा मौतें हुईं वहां के थानों से कोई रिपोर्ट नहीं उपलब्ध कराई गई. याचिका में विशेष तौर पर बजरिया थाने में दर्ज छह एफआइआर और नजीराबाद थाने मे दर्ज एक एफआइआर और दंगे के बारे में अन्य थानों में दर्ज बाकी मामलों की एसआइटी से जांच कराने की मांग की गई है.
3- यह भी कहा गया है कि कोर्ट इन मामलों की दोबारा जांच करने का आदेश दे जिनमें पुलिस पहले ही क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर चुकी है. इसके साथ ही अन्य थानों में दर्ज बाकी मामलों की भी दोबारा जांच कराई जाए.
 


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