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अब नहीं करेंगे कोर्ट के आदेश की अनदेखी...व्यवसायी पर 1.32 करोड़ का जुर्माना

दिल्ली के बरवाला गांव का मामला, व्यवसायी संजय गुप्ता ने कोर्ट के आदेश के बावजूद रिहायशी इलाके से अपनी फैक्टरी नहीं हटाई थी

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अब नहीं करेंगे कोर्ट के आदेश की अनदेखी...व्यवसायी पर 1.32 करोड़ का जुर्माना

अदालत की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यवसायी पर 1.32 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

खास बातें

  1. व्यवसायी संजय गुप्ता को दस दिनों की जेल की सजा भी दी
  2. 11 साल से ज्यादा वक्त तक फैक्टरी शिफ्ट नहीं की
  3. हर महीने का एक लाख का जुर्माना लगाया गया
नई दिल्ली:

कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यवसायी पर 1.32 करोड़ का जुर्माना लगाया है और दस दिनों की जेल की सजा दी है. कोर्ट ने कहा कि लोग कोर्ट के आदेशों की परवाह नहीं करते, कल यह करेंगे.

पिछले शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई जेएस खेहर ने कहा था कि हमें लोगों को जेल भेजने की चिंता नहीं है बल्कि चिंता कोर्ट के आदेशों का पालन कराने की है. सोमवार को ऐसे ही मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यवसायी पर 1.32 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया और दस दिन की जेल की सजा सुनाई. व्यवसायी ने कोर्ट के आदेश के बावजूद  रिहायशी इलाके से अपनी फैक्टरी नहीं हटाई थी.

व्यवसायी संजय गुप्ता के मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि लोग कोर्ट के आदेशों की परवाह नहीं करते लेकिन इस आदेश के बाद कल से करेंगे. कोर्ट ने व्यवसायी को दो विकल्प दिए कि या तो भारी जुर्माना दें और कुछ दिन जेल में काटें या फिर जुर्माना न दे और लंबा वक्त जेल में गुजारें. संजय गुप्ता ने पहला विकल्प चुना.

दरअसल कोर्ट के आदेश के बावजूद व्यवसायी ने 11 साल से ज्यादा वक्त तक फैक्टरी शिफ्ट नहीं की. इस पर कोर्ट ने हर महीने एक लाख का जुर्माना लगाया जो 1.32 करोड़ हुआ.


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दिल्ली के बरवाला गांव के लोगों ने संजय गुप्ता और सरकारी अफसरों पर अवमानना का मामला दाखिल किया था. आरोप था कि 2004 में कोर्ट के आदेश के बावजूद गुप्ता ने अपनी दो यूनिट शिफ्ट नहीं कीं. याचिकाकर्ताओं ने सरकारी अफसरों से मिलीभगत का आरोप लगाया. वहीं व्यवसायी का कहना था कि उसकी एक यूनिट के लिए बवाना में सरकार ने वैकल्पिक प्लाट दिया लेकिन दो यूनिटों के लिए कुछ नहीं किया.

यह अवमानना याचिका 2012 में दाखिल हुई जो 2014 में खारिज हो गई लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई और उसी वक्त संजय गुप्ता ने दोनों यूनिट बंद कर दीं.



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