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पश्चिम बंगाल : पंचायत चुनाव में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग, सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुना सकता है फैसला

पश्चिम बंगाल की बीजेपी इकाई की ओर से मुकुल रोहतगी और पीएस पटवालिया ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है.

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पश्चिम बंगाल : पंचायत चुनाव में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग, सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुना सकता है फैसला

पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में बीजेपी ने अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की है

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में अर्द्धसैनिक बलों की तैनातगी की मांग को लेकर बीजेपी की ओर से गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है और इस पर सोमवार को फैसला आ सकता है. पश्चिम बंगाल की बीजेपी इकाई की ओर से मुकुल रोहतगी और पीएस पटवालिया ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. कांग्रेस और बीजेपी आमतौर पर साथ नहीं होते लेकिन इस मुद्दे पर दोनों साथ हैं. कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव के खिलाफ याचिका दाखिल की है.  2013 में भी पंचायत चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया था. अब वही इतिहास दोहराया जा रहा है. बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया है कि बीजेपी उम्मीदवारों को नामांकन भी भरने नहीं दिया जा रहा है. उनके साथ हिंसा हो रही है और धमकाया जा रहा है.
 
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याचिका में मांग की गई है कि पंचायत चुनाव को लेकर 70 हजार मतदान बूथों के लिए पर्याप्त सुरक्षा मुहैया हो और ऐसे में उन्हें व उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए और ऑनलाइन नामांकन दाखिल करने की मंजूरी दी जाए. वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा राज्य में बीजेपी की उपस्थिति जीरो है. ये याचिका सिर्फ मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए है. आंकड़े बताते हैं कि कई जगह पर बीजेपी ने TMC से ज्यादा नामांकन दाखिल किए हैं. कोर्ट ने खुद ही कहा है कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरु होती है तो कोर्ट दखल नहीं देगा. ये आरोप गलत हैं और इस शिकायत को लेकर किसी भी उम्मीदवार ने शिकायत नहीं की है. 


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सिंघवी ने कहा कि ऑनलाइन नामांकन को मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि रिटर्निंग अफसर को प्रत्याशी और दस्तावेज की पडताल करनी पड़ती है. वहीं राज्य चुनाव आयोग ने भी बीजेपी की याचिका का विरोध किया है. केंद्र की ओर से पेश वकील तुषार मेहता ने कहा कि ये कोई टीवी डिबेट नहीं है. ये चुनाव आयोग और राज्य का का मामला है. केंद्र सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वो चुनाव के लिए सुरक्षा प्रदान करे. इसके लिए केंद्र की तरफ से अर्द्धसैनिक बलों और सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है.  

 



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