फर्जी बाबाओं के आश्रम-अखाड़ों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ याचिका पर SC विचार करने को तैयार

फर्जी बाबाओं के 17 आश्रम व अखाड़ों में महिलाओं से संबंधित आपराधिक गतिविधियों के आरोपों और इन आश्रम व अखाड़ों रह रही महिलाओं के बीच कोरोना महामारी फैलने के ख़तरे को लेकर दायर एक युवती के पिता की याचिका को सुप्रीम कोर्ट सुनने के लिए तैयार हुआ.

फर्जी बाबाओं के आश्रम-अखाड़ों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ याचिका पर SC विचार करने को तैयार

सुप्रीम कोर्ट- फाइल फोटो

देशभर में फर्जी बाबाओं के 17 आश्रम व अखाड़ों में महिलाओं से संबंधित आपराधिक गतिविधियों के आरोपों और इन आश्रम व अखाड़ों रह रही महिलाओं के बीच कोरोना महामारी फैलने के ख़तरे को लेकर दायर एक युवती के पिता की याचिका को सुप्रीम कोर्ट सुनने के लिए तैयार हुआ. 

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका तेलंगाना निवासी पिता ने दाखिल की है, जिसमें कहा है कि जुलाई 2015 में उनकी बेटी विदेश से डाक्टरी की उच्च शिक्षा की पढ़ाई करके आई थी, जोकि दिल्ली में एक फर्जी बाबा विरेंद्र दीक्षित के चुंगल में फंस गई और पिछले पांच सालों से इस बाबा के दिल्ली के रोहिणी इलाक़े में बने आश्रम आध्यात्मिक विद्यालय में रह रही है. ये बाबा बलात्कार के आरोप में तीन साल से फ़रार चल रहा है.

याचिका में कहा गया है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने देशभर में 17 आश्रम व अखाड़े को फर्जी करार दिया है. जिनमें ज़्यादातर अवैध निर्माण वाली बिल्डिंग में चल रहे हैं, जहां रहने लायक़ बेसिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. इनमें लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं जिनकी हालात जेल के क़ैदियों से भी बदतर है. कोरोना संकट काल में इन आश्रम और अखाड़े में कोरोना फैलने का ख़तरा बना हुआ है. इसलिए यहां रह रही लड़कियों और महिलाओं को इन आश्रम व अखाड़ों से सुरक्षित बाहर निकाला जाए.

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली के रोहिणी इलाके में बने आश्रम आध्यात्मिक विद्यालय को ख़ाली करवाया जाए, इस आश्रम में रह रही याचिकाकर्ता पिता की बेटी व अन्य 170 महिलाओं को आश्रम से मुक्त करवाया जाए. सुप्रीम कोर्ट 2 हफ्ते बाद मामले की सुनवाई करेगा.

आश्रमों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट विचार करने को तैयार है. SC ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से उनका पक्ष पूछा. CJI एस ए बोबडे ने कहा कि इस पर ध्यान दें कि क्या किया जा सकता है. यह हर किसी को बुरा नाम देता है. तेलंगाना के याचिकाकर्ता से एसजी के कार्यालय में  याचिका की प्रति देने के आदेश हुआ है. अब दो सप्ताह के बाद सुनवाई होगी.

याचिका में केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश देने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि इन आश्रमों में सैकड़ों महिलाओं को अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा गया है, जिससे COVID-19 फैलने का भारी खतरा है. सिकंदराबाद निवासी याचिकाकर्ता डम्पला रामरेड्डी ने भी देश में आध्यात्मिक संस्थाओं 'आश्रमों' की स्थापना के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग भी की है.

याचिका में कहा गया है कि सरकारी अधिकारी 'फर्जी बाबाओं' के खिलाफ कोई कार्रवाई करने में विफल रहे जो आश्रम चला रहे हैं और विशेषकर महिलाओं को फंसा रहे हैं. उन्होंने कहा है कि हजारों महिलाओं को आश्रमों में रहने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें ड्रग्स और नशीले पदार्थ दिए गए. दलीलों में कहा गया कि हालांकि वीरेंद्र देव दीक्षित, आसाराम बापू, राम रहीम बाबा आदि के खिलाफ बहुत गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं लेकिन उनके आश्रम अभी भी उनके करीबी सहयोगियों की मदद से चलाए जा रहे हैं और अधिकारी वहां उपलब्ध सुविधाओं का सत्यापन नहीं कर रहे हैं.

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याचिकाकर्ता ने बलात्कार के आरोपी दीक्षित के दिल्ली स्थित रोहिणी आश्रम आध्यात्म विश्वविद्यालय में भी हंगामा किया था जहां उनकी बेटी पिछले पांच साल से रह रही थी. वहां कई लड़कियों की शिकायतों के बाद अदालत द्वारा नियुक्त पैनल ने छापा मारा था. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि देश और राष्ट्रीय राजधानी में 17 आश्रमों में सैकड़ों/हजारों शिष्य रहते हैं.

उन्होंने कहा कि उनकी बेटी बाबाओं द्वारा फंसाए गए लोगों में से एक है. इस बाबा (वीरेंद्र देव दीक्षित) के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन, अधिकारियों द्वारा आश्रमों को बंद नहीं किया गया है और साथ ही ऐसे बाबाओं/आश्रमों को पैसे का स्रोत सरकार द्वारा पता लगाया नहीं लगाया गया है. याचिका में रोहिणी के वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम को भी बंद कराने की मांग है.