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सुप्रीम कोर्ट ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर पाबंदी संबंधी एनजीटी का आदेश निरस्त किया

शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण को पिछले साल 14 दिसंबर को उस याचिका पर ऐसा आदेश नहीं देना चाहिए था जिसका अमरनाथ गुफा धाम से कोई संबंध नहीं था.

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सुप्रीम कोर्ट ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर पाबंदी संबंधी एनजीटी का आदेश निरस्त किया

पवित्र अमरनाथ गुफा (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: उच्चतम न्यायालय ने अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले ‘महा शिवलिंग’ के सामने खड़े होने के समय श्रृद्धालुओं के लिये शांति बनाये रखने संबंधी राष्ट्रीय हरित अधिकरण का विवादित निर्देश सोमवार को निरस्त कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण को पिछले साल 14 दिसंबर को उस याचिका पर ऐसा आदेश नहीं देना चाहिए था जिसका अमरनाथ गुफा धाम से कोई संबंध नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संज्ञान लेकर NGT इस तरह के आदेश जारी नहीं कर सकता, ये उसके अधिकारक्षेत्र से बाहर है. एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया था कि पवित्र गुफा की तरफ जाने वाली करीब 30 सीढ़ियों पर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई श्रद्धालु कोई सामान लेकर नहीं जाए क्योंकि यह परंपरा बोर्ड की ही है. यह निर्देश इन बातों को ध्यान में रखते हुए दिए गए थे कि पवित्र गुफा की पवित्रता और मौलिकता बरक़रार रहे, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि शोर, गर्मी, कंपन आदि का विपरीत असर महाशिवलिंग पर न पड़े ताकि बाद के दिनों में आने वाले श्रद्धालु भी अमरनाथ महा शिवलिंग के दर्शन कर सकें.

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और इसके साथ ही याचिकाकर्ता गौरी मुलेखी से कहा कि वह अमरनाथ गुफा पर प्रदूषण के बारे में उचित याचिका दायर करे. अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि अधिकरण ने धार्मिक भजन गाने, वहां चढ़ाने के लिये प्रसाद ले जाने और श्रद्धालुओं को ले जाने के लिये खच्चर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है. पीठ ने बोर्ड के अधिकारियों से जानना चाहा कि जो श्रद्धालु गुफा तक की दूरी पैदल नहीं तय कर सकते, उन्हें वहां हेलीकॉप्टर से क्यों नहीं पहुंचाया जाता.

अधिकारी ने कहा कि करीब एक हजार लोगों को गुफा से लगभग चार किलोमीटर दूर उतारा जा सकता है परंतु इसके बाद उन्हें पैदल ही चलकर जाना होगा. रोहतगी ने कहा था कि रोजाना 15 हजार श्रद्धालु गुफा में दर्शन के लिये आते हैं और अधिकरण ने इस तरह के प्रतिबंध लगाकर गलती की है. पीठ ने याचिकाकर्ता गौरी मुलेखी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण वेणुगोपाल से सवाल किया कि इस मामले में उचित तरीके से आवेदन दायर क्यों नहीं किया जा सकता. पीठ ने कहा कि श्रद्धालुओं के गुफा तक प्रसाद ले जाने की बजाये उन्हें वहां प्रसाद दिया जा सकता है. वेणुगोपाल ने कहा कि अधिकरण ने पूरे क्षेत्र को शांत क्षेत्र घोषित नही किया है बल्कि खच्चर के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की है जिसकी वजह से वहां प्रदूषण होता है.


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