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पानी के संकट से घिरे इलाकों में वैज्ञानिक समस्या का स्थाई समाधान ढूंढेंगे

केंद्र सरकार ने पानी के विकराल संकट से ग्रस्त देश भर के करीब 1200 ब्लॉकों की शिनाख़्त की

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पानी के संकट से घिरे इलाकों में वैज्ञानिक समस्या का स्थाई समाधान ढूंढेंगे

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

देश में पानी का संकट गहराता जा रहा है. अब जल शक्ति मंत्रालय ने तय किया है कि पानी का सबसे ज्यादा संकट झेल रहे राज्यों में केंद्र सरकार वैज्ञानिकों को भेजेगी जो वहां पानी के संकट का स्थाई हल खोजेंगे. चेन्नई से दिल्ली तक और महाराष्ट्र से हिमाचल तक पानी का संकट है. गांव-देहात की हालत ज़्यादा ख़राब है जहां जल स्रोत सूखते जा रहे हैं. सरकार ने ऐसे करीब 1200 ब्लॉकों की शिनाख़्त की है जहां सबसे ज्यादा पानी का संकट है.

देश के 17 राज्यों के 1186 ब्लॉक या तालुकों में पानी संकट की समीक्षा की जाएगी. सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के मुताबिक ग्राउंड वाटर का सबसे ज्यादा 79 प्रतिशत एक्सप्लॉयटेशन पंजाब के ब्लॉक्स में हुआ है.  ग्राउंड वाटर का दूसरा सबसे ज्यादा एक्सप्लोइटेशन 65 फीसद दिल्ली में हुआ है. इसके बाद 63 प्रतिशत के साथ राजस्थान और 61 फीसदी के साथ हरियाणा का नंबर है.

जल शक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा कि हमने तय किया है कि देश में पानी की सबसे ज्यादा संकट झेल रहे करीब 1100 ब्लॉक में वैज्ञानिक भेजेंगे जो वहां जाकर समस्या का अध्ययन करेंगे. उनकी रिपोर्ट के आने के बाद हम आगे की रणनीति तय करेंगे. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली में पानी का संकट बड़ा है. अगर अभी पहल नहीं हुई तो पानी का संकट दिल्ली में और बड़ा हो सकता है.


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उधर ज़मीन पर पानी का संकट महाराष्ट्र में बढ़ता जा रहा है. जल शक्ति राज्यमंत्री ने राज्यसभा को बताया है कि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में ऐसे कई गांव हैं जहां लोग पीने के पानी के लिए पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं.

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पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु के अनुसार महाराष्ट्र की हस्ट्री में कभी इतने लंबे समय तक सूखा नहीं रहा है. मुझे डर है कि कहीं सूखा क्लाइमेट चेंज का बुरा असर तो नहीं है? जलवायु परिवर्तन एक वास्तविकता है इसे अनदेखा नहीं कर सकते. हमें क्लाइमेट प्रूफ एग्रीकल्चर पर काम करना होगा.

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साफ़ है इस पानी के संकट की वजह से प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता घटती जा रही है जो बड़े सवाल खड़े कर रहा है.



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