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गठबंधन तोड़ते वक्त 'बाला साहेब का सम्मान' कहां था : मोदी के बयान पर शिवसेना का पलटवार

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गठबंधन तोड़ते वक्त 'बाला साहेब का सम्मान' कहां था : मोदी के बयान पर शिवसेना का पलटवार

फाइल फोटो

मुंबई:

शिवसेना ने भाजपा पर करारा हमला करते हुए उस पर 25 साल पुराना गठबंधन तोड़ने का आरोप लगाया और अपने पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नए उपजे’ सम्मान पर सवाल उठाया।

गौरतलब है कि मोदी ने महाराष्ट्र में एक चुनाव रैली में दिवंगत बाल ठाकरे के प्रति सम्मान जताते हुए, भाजपा की पूर्व सहयोगी शिवसेना के खिलाफ कुछ नहीं कहा था।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है, मोदी कहते हैं कि वह अपने भाषणों में शिवसेना के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि वह बाला साहेब ठाकरे का सम्मान करते हैं। हम भी प्रधानमंत्री का सम्मान करते हैं।

मुखपत्र के संपादकीय में पार्टी ने कहा है, लेकिन जब केवल सीटों के बंटवारे के मुद्दे पर आपने हमारी पीठ में छुरा घोंपा तब वह सम्मान कहां था? हिन्दुत्व के सिद्धांतों पर किया गया गठबंधन तोड़ने से पहले आपने बाला साहेब के बारे में नहीं सोचा।

सांगली जिले के तासगांव में रविवार को चुनाव प्रचार कर रहे प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह बाल ठाकरे का सम्मान करते हैं, जिसके चलते शिवसेना के खिलाफ ‘एक शब्द भी नहीं कहेंगे।’ मोदी ने कहा था, राजनीतिक पंडित कह रहे हैं कि (चुनाव प्रचार के दौरान) अपने भाषणों में मोदी ने शिवसेना की आलोचना क्यों नहीं की। दिवंगत बाल ठाकरे के बिना यह पहला चुनाव है। मैंने शिवसेना के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहने का फैसला किया है। यह बाला साहेब ठाकरे को मेरी श्रद्धांजलि है।

शिवसेना ने भाजपा को ‘भ्रष्ट’ कांग्रेस और राकांपा के समकक्ष बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र की जनता को अब एहसास हुआ है कि राज्य के ‘असली और छिपे हुए’ चोर कौन हैं।

संपादकीय में कहा गया है, यह सर्वविदित तथ्य है कि कांग्रेस और राकांपा ने महाराष्ट्र को लूटा है। लेकिन गुजरात की मुख्यमंत्री आनन्दी बेन पटेल किस उद्देश्य से महाराष्ट्र आई थीं? अगर वह सभी उद्योगपतियों से महाराष्ट्र छोड़ कर गुजरात में अपना आधार बनाने के लिए कहती हैं तो यह भी महाराष्ट्र को लूटना ही हुआ।

इसमें आगे कहा गया है, आप राज्य के खजाने पर नजर रखने और (गुजरात के फायदे के लिए) मुंबई की खातिर सौदा करने को क्या कहेंगे ? क्या यह महाराष्ट्र को लूटना नहीं है? इसके बाद शिवाजी महाराज के आशीर्वाद की बातें करना दिखावे के अलावा और कुछ नहीं है। शिवसेना ने आगे लिखा है, पहले कभी किसी ने शिवाजी महाराज के आशीर्वाद का बाजार नहीं खोला।

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