'लेटर बम' के बाद कांग्रेस में उथल-पुथल, गुलाम नबी आजाद को महासचिव पद से हटाया गया

जितिन प्रसाद को भी महासचिव के रूप में भी नामित किया गया है, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश से बंगाल स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां अगले साल चुनाव होने हैं. 

'लेटर बम' के बाद कांग्रेस में उथल-पुथल, गुलाम नबी आजाद को महासचिव पद से हटाया गया

नई दिल्ली:

Ghulam Nabi Azad. कांग्रेस के दिग्गज गुलाम नबी आज़ाद जिन्हें गांधी परिवार (Gandhi Family) के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले असंतुष्ट नेताओं में प्रमुख माना जाता है, उन्हें पार्टी में हुए बड़े बदलावों के बीच पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी ने महासचिव पद से हटा दिया है. सोनिया गांधी द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र में कहा गया, "पार्टी पूरे दिल से निवर्तमान महासचिवों गुलाम नबी आजाद, मोती वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुइजिन्हो फलेइरो के योगदान की सराहना करती है."

गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य बने रहेंगे. जो कि पार्टी के शीर्ष निर्णय लेने वाला पैनल है. असंतुष्ट नेताओं के समूह के एक अन्य सदस्य जितिन प्रसाद को परमानेंट इनवाइटी बनाया गया है. जितिन प्रसाद को भी महासचिव के रूप में भी नामित किया गया है, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश से बंगाल स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां अगले साल चुनाव होने हैं. प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी की प्रभारी महासचिव हैं.

कांग्रेस पार्टी में ये बड़ा फेरबदल उस घटना के एक महीने बाद हुआ है जब पार्टी के 23 वरिष्ठ सदस्यों ने बागी तेवर दिखते हुए कांग्रेस की आंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के आंतरिक चुनाव करवाने और पूर्णकालिक पारदर्शी नेतृत्व की मांग की थी. आज हुए बदलावों में मुकुल वासनिक जो कि 23 पत्र-लेखकों में से एक थे, उन्हें कांग्रेस ने मध्य प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाया है.

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मुकुल वासनिक उन 6 नेताओं में शामिल किया गया हैं जो कांग्रेस अध्यक्ष को संगठनात्मक और संचालन मामलों में सहायता करेंगे. जैसा कि सोनिया गांधी ने 24 अगस्त की बैठक में कहा था. इस पैनल के अन्य नेताओं में एके एंटनी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला हैं. 

यह विशेष समिति असहमति पत्र के किसी भी प्रभाव का एकमात्र संकेत है, जिसने पार्टी को बीच में से विभाजित कर दिया और पत्र लेखकों को पार्टी में अलग-थलग कर दिया. रणदीप सिंह सुरजेवाला फेरबदल के सबसे बड़े लाभार्थियों में से हैं. उन्हें कर्नाटक का प्रभारी महासचिव नामित किया गया है और  वह विशेष समिति में हैं और इसके साथ ही मुख्य प्रवक्ता के रूप में भी अपना कार्यकाल जारी रखेंगे.

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गुलाम नबी आज़ाद और पत्र पर अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं पर सीडब्ल्यूसी की 24 अगस्त की बैठक में "विश्वासघाती" के रूप में हमला किया गया था, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों उपस्थित थे. यह बैठक इस घोषणा के साथ समाप्त हुई थी कि अगले छह महीनों में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) सत्र तक सोनिया गांधी अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष बनी रहेंगी.

इस बैठक में कथित तौर पर यह भी तय किया गया था कि पार्टी पत्र लेखकों की शिकायतों की जांच करेगी. ऐसे में आज घोषित विशेष समिति उसी वादे को संबोधित करने के लिए है.
 

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संगठन की मजबूती के लिए कांग्रेस पार्टी में चुनाव जरूरी: गुलाम नबी आजाद

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