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राष्ट्रपति पद के लिए शिवसेना की पसंद शरद पवार, विपक्ष चाहे निर्विरोध चुनाव

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राष्ट्रपति पद के लिए शिवसेना की पसंद शरद पवार, विपक्ष चाहे निर्विरोध चुनाव

शिवसेना एनसीपी के मुखिया शरद पवार को राष्ट्रपति बनाने के पक्ष में है.

खास बातें

  1. प्रधानमंत्री विपक्ष से बात करें तो निर्विरोध चुनाव मुमकिन : शरद पवार
  2. सर्वसम्मति बनने पर बीजेपी भी शरद पवार को समर्थन दे : संजय राउत
  3. शरद पवार ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से खुद को सार्वजनिक रूप से दूर रखा
मुंबई: आगामी राष्ट्रपति चुनाव निर्विरोध कराने की पहल की गई है. इस पहल के लिए विपक्ष की तरफ से अगुवाई कर रहे हैं एनसीपी के मुखिया शरद पवार. महाराष्ट्र के सोलापुर में नागरिक सम्मान का जवाब देते हुए शरद पवार ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री विपक्ष से बात करें तो राष्ट्रपति चुनाव निर्विरोध कराया जा सकता है. पवार ने यह भी कहा कि एनडीए को जरूरी समर्थन प्राप्त है.

इस बीच सर्वसम्मति के धागे को पकड़कर शिवसेना ने शरद पवार को ही सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में पेश किया है. शिवसेना नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने एनडीटीवी इंडिया से बातचीत में कहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए शरद पवार के नाम पर सर्वसम्मति बन जाए तो बीजेपी को भी शरद पवार को समर्थन देना चाहिए.

राष्ट्रपति चुनाव को सर्वसम्मति से निर्विरोध कराने की पहल होती देख शिवसेना शरद पवार की उम्मीदवारी में अपना योगदान देख रही है. उसके लिए शरद पवार एक ऐसा नाम है जिस बहाने वह अपना मूल एजेंडा चला पाएगी. शिवसेना को फिलहाल शरद पवार राष्ट्रपति चुनाव के लिए सबसे काबिल उम्मीदवार नजर आ रहे हैं. राउत ने कहा है कि पावर काबिल हैं और काबिल राष्ट्रपति भी बन सकते हैं.

गौरतलब है कि शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हालिया एनडीए की बैठक में शिरकत कर बीजेपी के उम्मीदवार को समर्थन का ऐलान किया है. लेकिन इस बीच वामपंथी नेता सीताराम येचुरी की तरफ से शरद पवार का नाम विकल्प के रूप में लेने से शिवसेना का मन डोल गया लगता है. हालांकि शिवसेना नेता संजय राउत याद दिला रहे हैं कि पार्टी की पहली पसंद मौजूदा स्थिति में अब भी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ही हैं.

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हालांकि खुद शरद पवार ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से खुद को सार्वजनिक रूप से दूर रखा है और उनकी पार्टी भी इस बात को दोहरा रही है. लेकिन चुनाव निर्विरोध कराने की पेशकश करके इस खेल में वे अपनी अहमियत कम नहीं होने देना चाहते. इसलिए शरद पवार ने याद दिलाया है कि राष्ट्रपति पद का चुनाव ऐसा नहीं कि उसे लड़कर ही नतीजा हासिल हो.

राष्ट्रपति चुनाव एनडीए और विपक्षी दलों के लिए फिलहाल टेढ़ी खीर होगी. ऐसे में यह भी देखना रोचक होगा कि क्या कांग्रेस राष्ट्रपति चुनाव में शरद पवार के पीछे पूरी ताकत लगाएगी?


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