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महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के बीच सोनिया गांधी से मिले शरद पवार, कहा - हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है लेकिन आगे...

शरद पवार ने कहा कि हमें (एनसीपी) को महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है. लेकिन मैं यह अभी नहीं कह सकता है कि आगे क्या होगा. पवार ने कहा कि बीजेपी और उनके सहयोगी के पास संख्या है, सरकार बनाने की जिम्मेदारी उनकी है.

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खास बातें

  1. शरद पवार ने कहा - विपक्ष में बैठने के लिए मिला है जनादेश
  2. शरद पवार ने की सोनिया गांधी से मुलाकात
  3. मुलाकात के बाद मीडिया से भी की बात
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र में मौजूद राजनीतिक संकट के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद शरद पवार ने मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि मैनें आज सोनिया गांधी और एके एंटनी से मुलाकात की. हालांकि मेरे पास उस मुलाकात को लेकर ज्यादा कुछ बताने के लिए नहीं है. लेकिन मैं महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर आपसे बात कर सकता हूं. उन्होंने आगे कहा कि हमें (एनसीपी) महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है. लेकिन मैं यह अभी नहीं कह सकता है कि आगे क्या होगा. पवार ने कहा कि बीजेपी और उनके सहयोगी के पास संख्या है, सरकार बनाने की जिम्मेदारी उनकी है.

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उन्होंने मीडिया के सवाल पर कहा कि मेरी अभी तक उद्धव ठाकरे से कोई बात नहीं हुई है. अभी तक हमें किसी ने पूछा ही नहीं, किसी को पूछना तो चाहिए. शिवसेना से क्या सरकार बनाने पर बात हुई, के सवाल के जवाब में पवार ने कहा कि संजय राउत मुझसे मिलते रहते हैं. लेकिन उनके और हमारे बीच सरकार गठन को लेकर कोई बात नहीं हुई है. पवार ने इस दौरान राज्य में किसानों की हालत पर भी बात की.

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उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियों की राजनीति की वजह से राज्य में नई सरकार नहीं बन पा रही है. जिन्हें जनादेश मिला है उन्हें जल्दी से सरकार बनानी चाहिए. ताकि बारिश से किसानों को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जा सके. लेकिन सरकार न होने की वजह से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है. शरद पवार से जब पूछा गया कि क्या वह राज्य के मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करेंगे,  इसपर उन्होंने जवाब दिया कि ऐसी कोई बात नहीं है.

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इससे पहले सोमवार शाम को शिवसेना नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के राज्यपाल से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद राउत ने कहा कि सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के लिए उनकी पार्टी जिम्‍मेदार नहीं है. उन्‍हेंने कहा कि जिसके पास भी बहुमत होगा उसकी ही सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि हमनें मौजूदा स्थिति को लेकर राज्यपाल से बात की है. राउत ने कहा कि राज्यपाल के साथ यह मुलाकात पूरी तरह से गैर-राजनीतिक थी. इस मुलाकात के दौरान राज्यपाल और राउत के बीच राज्य में मौजूद राजनीतिक स्थिति पर भी बात हुई.

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उन्‍होंने कहा कि हमने राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखी जिसे उन्‍होंने बहुत अच्‍छे से सुना. हम उन्‍हें बस यही बताना चाहते थे कि सरकार का गठन नहीं हो पा रहा है और इसके लिए हमारी पार्टी जिम्‍मेदार नहीं है. बता दें कि राज्य में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना और बीजेपी के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर बात नहीं बन पा रही है. शिवसेना राज्य में 50-50 के फॉर्मूले को लागू कराना चाहती है. जिसके तहत ढाई साल बीजेपी का और ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री रहेगा. लेकिन बीजेपी शिवसेना के इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हो रही है.

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महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने रविवार को कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा से केवल मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही बातचीत करेगा. राज्य में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से दोनों गठबंधन साझीदारों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर गतिरोध बना हुआ था. इस चुनाव में 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना ने 56 और भाजपा ने 105 सीटों पर जीत दर्ज की. राउत ने पत्रकारों से कहा था कि गतिरोध जारी है. सरकार गठन को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है. अगर बातचीत होगी, तो केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर ही होगी.

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वहीं न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक संजय राउत ने कहा था कि हमारे पास 170 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है. यह आंकड़ा 175 भी हो सकता है. वहीं शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना' के साप्ताहिक स्तंभ में राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन पर राजनीतिक गतिरोध ‘अहंकार के कीचड़ में फंसे एक रथ' की तरह है.उन्होंने साप्ताहिक स्तंभ में राउत भाजपा को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा कर दिखाने की चेतावनी देते हुए कहा था कि यह कदम पार्टी की ‘सदी की सबसे बड़ी हार' होगी. उन्होंने कहा था कि यह चौंकाने वाली बात है कि वे लोग ऐसा करने की बात कर रहे हैं जो इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल को ‘काले दिवस' के रूप में मनाते हैं.

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शिवसेना का यह बयान भाजपा के मुख्यमंत्री पद साझा ना करने के अपने रुख पर अड़े रहने और पार्टी के नेता सुधीर मुंगंतीवार के सात नवम्बर तक नई सरकार का गठन ना होने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ने की बात कहने के बाद आया है.

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