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इतिहास के साथ छेड़खानी, पूरी कौम के साथ छेड़खानी है : संसद में शरद यादव

विचारों में भिन्नता होती है. नहीं होगी तो फिर लोकतंत्र किस काम का. महात्मा गांधी ने कहा था कि लोकतंत्र गोली से नहीं बोली से चलेगा.

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इतिहास के साथ छेड़खानी, पूरी कौम के साथ छेड़खानी है : संसद में शरद यादव

भारत छोड़ो आंदोलन पर शरद यादव

खास बातें

  1. मेरे दादा-परदादा आजादी की लड़ाई में शामिल थे
  2. इतिहास की गवाही बुनियाद होती है
  3. इतिहास से छेड़खानी पूरी कौम से छेड़खानी
नई दिल्ली: संसद में भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर शरद यादव ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरे दादा-परदादा आजादी की लड़ाई में शामिल थे. आजादी की लड़ाई के लिए झांसी की रानी, मंगल पाड़ें और भगत सिंह समेत कइयों ने कुर्बानियां दीं. कितने ही लोग कुर्बान हो गए. ये लड़ाई साझा है. अगर देश साझा विरासत को याद नहीं रखगा तो कई तरह के भम्र में पड़ा रहेगा. इतिहास की गवाही बुनियाद होती है.

इतिहास से छेड़खानी कौम से छेड़खानी
जो मुल्क इतिहास के साथ छेड़खानी करता है, वह पूरी कौम के साथ छेड़खानी होती है. विचारों में भिन्नता होती है. नहीं होगी तो फिर लोकतंत्र किस काम का. महात्मा गांधी ने कहा था कि लोकतंत्र गोली से नहीं बोली से चलेगा. शरद यादव ने कहा कि जिंदा लोगों की हिफाजत के लिए कोई किताब है तो वह संविधान है. 

पढ़ें: गांधी का मंत्र था - करो या मरो, हमारा मंत्र है - करेंगे, और करके रहेंगे : पीएम मोदी

इससे पर्व पीएम नरेंद्र मोदी कहा कि देश की आज़ादी के लिए वर्ष 1942 में छेड़े गए 'भारत छोड़ो आंदोलन' के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा कि जीवन की अच्छी घटनाओं को याद करने से ताकत मिलती है, और नई पीढ़ी तक सही बात पहुंचाना हमारा कर्तव्य रहता है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्वर्णिम पृष्ठों को आने वाली पीढ़ियों को पहुंचाना हमारा दायित्व रहता है.

आजाद हिन्दुस्तान का मंत्र करेंगे और करके रहेंगे : पीएम मोदी
उन्होंने कहा, देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इतने व्यापक और तीव्र आंदोलन की कल्पना अंग्रेजों ने नहीं की थी. महात्मा गांधी समेत कई नेता जेल चले गए और उसी समय कई नए नेताओं का भी जन्म हुआ. लाल बहादुर शास्त्री और राम मनोहर लोहिया समेत कई नेताओं ने उस समय उस जगह को भरा. पीएम ने कहा, महात्मा गांधी के मुंह से 'करेंगे या मरेंगे' शब्द देश के लिए अजूबा थे. गांधी ने कहा था कि मैं पूर्ण स्वतंत्रता से कम किसी भी चीज पर संतुष्ट होने वाला नहीं हूं. हम करेंगे या मरेंगे. उस समय जनभावनाओं के अनुकूल बापू ने इन शब्दों का प्रयोग किया था. हर कोई इन शब्दों के साथ जुड़ गया था. आज आजाद हिन्दुस्तान का मंत्र है - करेंगे और करके रहेंगे.


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