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PNB की एक और कहानी, जब लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ने पेंशन से चुकाया था 5 हजार रुपये का कार लोन

1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने फिएट कार खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक से पांच हजार का लोन लिया था.

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PNB की एक और कहानी, जब लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ने पेंशन से चुकाया था 5 हजार रुपये का कार लोन

पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री की फिएट कार

खास बातें

  1. पीएनबी से पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने कार लोन ली थी.
  2. उस लोन को उनकी पत्नी ने पेंशन से चुकता किया था.
  3. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शेयर की यह कहानी.
नई दिल्ली:

पंजाब नेशनल बैंक, यानी PNB का नाम आजकल सुर्खियों में लगातार छाया हुआ है और बैंक को 'चूना लगने' तथा उसके बेवकूफ बन जाने की कहानी बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर है. लेकिन इसी माहौल में पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने PNB के ही एक ऐसे पुराने ग्राहक को याद किया है, जिसकी पत्नी ने उनकी मौत के बावजूद अपनी मासिक पेंशन से कर्ज़ की किश्तें अदा कीं, और पूरी तरह कर्ज़ चुकता किया.
 
शशि थरूर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर PNB के जिस ग्राहक का ज़िक्र किया है, वह और कोई नहीं, देश में ईमानदारी और दृढ़ता की मिसाल माने जाने वाले भूतपूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री थे, जिन्होंने वर्ष 1965 में PNB से फियेट कार खरीदने के लिए 5,000 रुपये का कर्ज़ लिया था.

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लाल बहादुर शास्त्री के बैंक अकाउंट में 7 हजार रुपये थे, मगर नई कार की कीमत 12 हजार रुपये थी. इसके लिए पूर्व पीएम शास्त्री ने पीएनबी में लोन के लिए अप्लाई किया था और उन्हें उसी दिन लोन भी मिल गया था. बता दें कि लोन लेकर पूर्व पीएम ने जो कार खरीदी थी, उसका नंबर DLE 6 था.

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लाल बहादुर शास्त्री की इस कहानी को कांग्रेस के नेता और सांसद शशि थरूर ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर बयां किया है. शशि थरूर के इस ट्वीट में लाल बहादुर शास्त्री के कार की फोटो है, जो सोशल मीडिया पर काफा वायरल हो रही है और लोग इसे खूब शेयर कर रहे हैं. 

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की उस कार की फोटो को शेयर करते हुए शशि थरूर ने लिखा है कि- 1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने फियेट कार खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक से पांच हजार रुपये का लोन लिया था. जब उनका लोन जल्द ही मंजूर हो गया तो, उन्होंने बैंक से कहा कि आम आदमी को भी ऐसा विशेषाधिकार होना चाहिए. 

मगर इसके एक साल बाद 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की मौत ताशकंद में हो गई, जहां वह भारत-पाक युद्ध की समाप्ति के बाद होने वाले ताशकंद समझौते के लिए गये थे. जब शास्त्री जी की मौत बिना लोन चुकाए हो गई तो बैंक ने उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को एक पत्र लिखा, जिसमें पांच हजार रुपये बैंक के लोन बकाया होने का जिक्र था.

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उसके बाद उनकी पत्नी ने परिवार के पेंशन के पैसे बैंक को लोन को चुकता किया. उन्होंने लोन का पाई-पाई चुका दिया. शशि थरूर लिखते हैं कि उनके घर पर मौजूद फिएट कार अभी भी पुरुषों की एक अलग नस्ल के युग की याद दिलाती है.

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बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना 1894 में हुई थी. मगर अभी यह बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े फ्रॉड का सामना कर रही है. 

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