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50-50 के फॉर्मूले पर बोले शिवसेना सांसद संजय राउत- पहले भी मुकर चुकी है BJP, अब जो भी बात होगी लिखित होगी

50-50 के फॉर्मूले पर बोले शिवसेना सांसद संजय राउत- पहले भी मुकर चुकी है BJP, अब जो भी बात होगी लिखित होगी

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मुंबई:

महाराष्ट्र में भाजपा पर दबाव बनाते हुए शिवसेना ने 50-50 के फॉर्मूले की मांग कर रही है. भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया है, लेकिन अभी तक सरकार बनाने को लेकर कोई बात नहीं हुई है. सोमवार को शिवसेना और भाजपा दोनों पार्टियों को प्रतिनिधिमंडलों ने राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात की है. एनडीटीवी से बात करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, 'वे(भाजपा) अपने वादे से नहीं मुकर सकते.' बता दें, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार सुबह राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की. यह मुलाकात राज्य में गठबंधन सहयोगियों भाजपा-शिवसेना के बीच सत्ता को लेकर जारी झगड़े के बीच हुई है. राज भवन के एक अधिकारी ने बताया कि यह ‘औपचारिक मुलाकात थी.'  वहीं, दूसरी ओर शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से मुलाकात की है.

महाराष्ट्र में 50-50 के फॉर्मूले पर कहा, 'यह उनका(भाजपा) हमारे साथ समझौता है. इसको समझाना चाहिए. उन्होंने मीडिया के सामने यह बात कही थी. वे अपनी बात से नहीं मुकर सकती.'


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बता दें, ‘शोले' फिल्म में रहीम चाचा के डायलॉग ‘.....इतना सन्नाटा क्यों है भाई?' का इस्तेमाल करते हुए महाराष्ट्र में भाजपा की गठबंधन सहयोगी शिवसेना ने देश में आर्थिक सुस्ती को लेकर सोमवार को केन्द्र सरकार पर निशाना साधा. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना' के संपादकीय में लिखा है, ‘...इतना सन्नाटा क्यों है भाई????' इस डायलॉग के माध्यम से पार्टी ने देश और महाराष्ट्र में छायी आर्थिक सुस्ती को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. ‘शोले' फिल्म में यह डायलॉग रहीम चाचा (एके हंगल) का है जब गब्बर सिंह (अमजद खान) बाहर नौकरी के लिए जा रहे उनके बेटे की हत्या कर उसकी लाश एक घोड़े पर रखकर गांव में भेजता है. उस दौरान सभी गांव वाले एकदम चुप हैं और दृष्टिबाधित खान चाचा सबसे सवाल करते हैं ‘.....इतना सन्नाटा क्यों है भाई??'

शिवसेना ने इस डायलॉग के माध्यम से देश में आर्थिक सुस्ती और त्योहारों के मौके पर बाजारों से गायब रौनक के लिए सरकार के नोटबंदी और गलत तरीके से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने को जिम्मेदार बताया है. उसने सामना में लिखा है, ‘‘सुस्ती के डर से बाजारों की रौनक चली गयी है और बिक्री 30 से 40 प्रतिशत की कमी आयी है. उद्योगों की हालत खराब है और विनिर्माण इकाइयां बंद हो रही हैं, इससे लोगों की नौकरियां जा रही हैं.''

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मराठी ‘सामना' ने लिखा है कि कई बैंकों की हालत खराब है, वे वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और लोगों के पास खर्च करने को पैसा नहीं है. ‘सामना' ने लिखा है, ‘‘दूसरी ओर सरकार भी भारतीय रिजर्व बैंक से धन निकालने को मजबूर हुई है. दीवाली पर बाजारों में सन्नाटा छाया है, लेकिन विदेशी कंपनियां ऑनलाइन शॉपिंग साइटों के माध्यम से देश के पैसे से अपनी तिजोरियां भर रही हैं.''

संपादकीय में लिखा है, बेवक्त हुई बारिश के कारण किसानों की तैयार फसल खराब हो गयी जिससे उनकी माली हालत खराब है. ‘लेकिन बदकिस्मती है कि कोई भी किसानों को इससे बाहर निकालने की नहीं सोच रहा है.' संपादकीय में दावा किया गया है कि यहां तक कि दिवाली से ऐन पहले हुए राज्य विधानसभा चुनावों में भी शोर कम और ‘सन्नाटा' ज्यादा था.

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