क्या भाभीजी का पापड़ खाकर इतने लोग कोरोना से हुए ठीक? संसद में संजय राउत का तंज

संजय राउत ने कहा, "मेरी मां और मेरा भाई COVID-19 से संक्रमित हैं. महाराष्ट्र में भी कई लोग ठीक हो रहे हैं. आज धारावी में स्थिति नियंत्रण में है. WHO ने BMC के प्रयासों की सराहना की है.

खास बातें

  • महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण बेकाबू होने के आरोपों पर बरसे संजय राउत
  • पूछा- इतने लोग जो ठीक हुए, क्या भाभीजी का पापड़ खाए थे?
  • जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट के निजीकरण का किया विरोध
नई दिल्ली:

शिव सेना (Shiv Sena) के राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने गुरुवार (17 सितंबर) को सदन के उन सदस्यों को करारा जवाब दिया जो महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना मामलों पर शिव सेना सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे. कोरोना वायरस संक्रमण पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन के बयान पर सदन में चर्चा के दौरान के राउत ने पलटवार करते हुए कहा, "मैं सदस्यों से पूछना चाहता हूं कि इतने लोग कैसे ठीक हुए? क्या सभी लोग भाभीजी का पापड़ खाकर ठीक हो गए?" उन्होंने कहा, "यह एक राजनीतिक लड़ाई नहीं है बल्कि लोगों के जीवन को बचाने की लड़ाई है."

राउत ने कहा, "मेरी माँ और मेरा भाई COVID-19 से संक्रमित हैं. महाराष्ट्र में भी कई लोग ठीक हो रहे हैं. आज धारावी में स्थिति नियंत्रण में है. WHO ने BMC के प्रयासों की सराहना की है. मैं इन तथ्यों को बताना चाहता हूं क्योंकि यहां कुछ सदस्य महाराष्ट्र सरकार की आलोचना कर रहे थे."

संजय राउत यहीं नहीं रुके. उन्होंने देश की खस्ता आर्थिक स्थिति पर भी तंज कसा. राउत ने सरकार से मांग की कि वह लाभकारी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट का निजीकरण नहीं करे. उन्होंने  शून्यकाल में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के निजीकरण का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी व कोविड—19 महामारी के कारण देश की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. हमारी जीडीपी और हमारा रिजर्व बैंक भी खस्ताहाल हो गया है.

उन्होंने कहा, "देश की आर्थिक हालत बहुत गंभीर है,अब स्थिति ऐसी है कि हमारी GDP और हमारा RBI भी कंगाल हो चुका है, ऐसे में सरकार एयर इंडिया,रेलवे, LIC और काफी कुछ बाज़ार में बेचने के लिए लाया है बहुत बड़ा सेल लगा है. अब इस सेल में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट को भी खड़ा कर दिया गया है." 

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उन्होंने कहा, "पोर्ट ट्रस्ट के निजीकरण का मतलब है 7000 एकड जमीन को निजी हाथों में दे देना. इससे बेरोजगारी भी बढेगी क्योंकि निजीकरण होने पर सबसे पहले कामगारों की छंटनी होगी. यह एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह खास है."

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