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राष्ट्रपति पद के लिए शिवसेना ने बताया संघ प्रमुख मोहन भागवत को बेहतर विकल्प

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राष्ट्रपति पद के लिए शिवसेना ने बताया संघ प्रमुख मोहन भागवत को बेहतर विकल्प

संघ प्रमुख मोहन भागवत (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. पीएम मोदी ने 29 मार्च के रात्रिभोज में उद्धव ठाकरे को आमंत्रित किया है
  2. 'शिवसेना के वोटों की जरुरत है तो बातचीत करने के लिए मातोश्री आना होगा'
  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद NDA के घटक दलों से संवाद की पहल की है
मुंबई: देश के राष्ट्रपति का चुनाव वैसे दूर लग रहा हो लेकिन उसकी सुगबुगाहट तेज़ हो चली है. इस बीच शिवसेना ने सरसंघचालक मोहन भागवत को बेहतर विकल्प बता कर कानाफूसी की खबरों में तड़का लगा दिया है. पार्टी सांसद और शिवसेना के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने मुंबई में संवाददाताओं के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि दिल्ली के गलियारों में आरएसएस चीफ मोहन भागवत को राष्ट्रपति बनाए जाने की खबरें चल रही हैं. मोहन भागवत एक बेहतर विकल्प हैं. वे प्रखर राष्ट्रवादी भी हैं. हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए यह ठीक भी होगा. हालांकि, अंतिम फैसला शिवसेना पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे करेंगे. संजय राउत से राष्ट्रपति चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की हुई डिनर डिप्लोमसी को लेकर कई सवाल पूछे गए थे. NDA के घटक दलों से संवाद बढ़ाने और राष्ट्रपति चुनाव में उतारे जानेवाले उम्मीदवार को सभी घटक दलों से समर्थन दिलाने के लिए 29 मार्च के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में प्रीतिभोज का आयोजन किया है.

इस मौके पर उपस्थित रहने का आमंत्रण बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा उद्धव ठाकरे को दिए जाने की सूचना सामने आयी है. बीजेपी की तरफ से इस पहल को दोनों दलों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए उठाया कदम बताया जा रहा है. इसपर खुलासा करते हुए संजय राउत ने कहा, 'अगर शिवसेना के वोटों की जरुरत है तो बातचीत करने के लिए मातोश्री आना होगा. यहां पर बता दें कि मातोश्री उद्धव ठाकरे का घर है.

इस मौके पर संजय राउत यह बताने से नहीं चूके कि पिछले 2 राष्ट्रपति चुनाव में योग्यता में कम आंकने पर शिवसेना ने NDA के उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया था. भारत के प्रथम नागरिक के तौर पर अगले राष्ट्रपति का चुनाव जुलाई के अंत में होना है जिसमें सांसद और सभी राज्यों के विधायक वोट करते हैं. मौजूदा संख्याबल में भले ही बीजेपी की सर्वाधिक राज्य सरकारें हों लेकिन उनकी ताक़त संसद में विपक्ष के मुक़ाबले कमजोर है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद NDA के घटक दलों से संवाद की पहल की है.


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