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उपचुनाव में बीजेपी की हार पर शिवसेना ने किया तंज, विपक्ष पर भी उठाए सवाल

सामना में कहा गया है कि मंगलवार को सोनिया गांधी के घर में तकरीबन 20 पार्टी के नेता 'डिनर डिप्लोमेसी' में शामिल हुए. इस बैठक के ज़रिए सोनिया गांधी बीजीपी के खिलाफ एक नए गठबंधन को उभारने की कोशिश कर रही हैं.

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उपचुनाव में बीजेपी की हार पर शिवसेना ने किया तंज, विपक्ष पर भी उठाए सवाल

उद्धव ठाकरे की फाइल फोटो

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और बिहार उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार पर शिवसेना ने तंज कसा है. उसने अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से शिवसेना ने कहा है कि यूपी और बिहार लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार से विपक्ष को बल मिलेगा. इस परिणाम से यह तो साफ है कि अब आम जनता को पता चल गया है कि उसके साथ बीजेपी ने धोखा किया है. शिवसेना ने सामना में  सोनिया गांधी द्वारा विपक्षी पार्टियों को डिनर पर बुलाने का भी जिक्र किया गया है. शिवसेना ने कहा कि इस डिनर डिप्लोमेसी के माध्यम से सोनिया गांधी बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष बनाना चाहती हैं. शिवसेना ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी कई सवाल खड़े किए.

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विपक्ष पर भी उठाए सवाल
सामना में कहा गया है कि मंगलवार को सोनिया गांधी के घर में तकरीबन 20 पार्टी के नेता 'डिनर डिप्लोमेसी' में शामिल हुए. इस बैठक के ज़रिए सोनिया गांधी बीजीपी के खिलाफ एक नए गठबंधन को उभारने की कोशिश कर रही हैं. कुछ दिन पहले मुंबई में आयोजित एक मीडिया के सभा में भी सोनिया गांधी ने कहा था कि "हम 2019 में किसी भी हालत में बीजेपी को सत्ता में आने नहीं देंगे". गुजरात चुनाव के समय राहुल गांधी ने बहुत मेहनत की और इसका असर शाह-मोदी पर भी पड़ा, जिसके बाद राहुल गांधी के हाथों में कांग्रेस की कमान सौंप दी गई. लेकिन इसके बावजूद डिनर डिप्लोमेसी का न्योता सोनिया गांधी को देना पड़ा. अगर राहुल गांधी न्योता देते तो कितने लोग इस भोज में सहभागी होते? गौरतलब है कि सोनिया गांधी के डिनर में तेजस्वी यादव, शरद पवार, रामगोपाल यादव और सतीश मिश्रा भी मौजूद थे. 

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विपक्ष का नेता कौन?
2019 में जहां बीजेपी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी, वहीं विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा यह एक बड़ा सवाल है. साथ ही उस समय ममता बनर्जी और नवीन पटनायक की क्या भूमिका होगी. इस पर भी सबकी नज़रें बनी हुई हैं. राहुल गांधी अब कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन अब भी उनके पास सभी विपक्षी पार्टियों को लेकर एकसाथ चलने की काबिलियत नहीं है. वहीं शरद पवार, मायावती और ममता बनर्जी भी प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं.

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ऐसे में राहुल गांधी को अपने संगठन और खुद की छवि को सुधारने की ज़रूरत है. अगले साल के चुनाव में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के "हीरो" वाली छवि से मुकाबला करना होगा. 


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