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शिवसेना के संजय राउत ने मौजूदा परिदृश्य में 'विपक्षी पार्टी' के अस्तित्व को लेकर खड़े किए सवाल, कहा...

संजय राउत ने मौजूदा परिदृश्य में 'विपक्षी पार्टी' के अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल भी खड़ा किया. उन्होंने कहा, 'मराठवाडा में पानी की कमी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के समान ही महत्वपूर्ण है, लेकिन कोई भी इस विशेष मुद्दे का हवाला देते हुए पार्टी नहीं छोड़ रहा है.'

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शिवसेना के संजय राउत ने मौजूदा परिदृश्य में 'विपक्षी पार्टी' के अस्तित्व को लेकर खड़े किए सवाल, कहा...

शिवसेना नेता संजय राउत

खास बातें

  1. संसदीय लोकतंत्र का सम्मान करने के लिए नेहरू और कांग्रेस की तारीफ की
  2. मौजूदा परिदृश्य में 'विपक्षी पार्टी' के अस्तित्व को लेकर खड़े किए सवाल
  3. शिवसेना में शामिल होने के लिए कतार में खड़े अवसरवादियों पर कटाक्ष किया
पुणे:

शिवसेना (Shiv Sena) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने संसदीय लोकतंत्र का सम्मान करने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) और कांग्रेस पार्टी (Congress Party) की रविवार को सराहना की. उन्होंने मौजूदा परिदृश्य में 'विपक्षी पार्टी' के अस्तित्व को लेकर सवाल भी खड़े किए. उन्होंने कहा कि विपक्ष की अनुपस्थिति किसी देश की राजनीति को मनमाना और एकतरफा बना देती है. शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में साप्ताहिक स्तंभ लेखन में पार्टी सांसद ने अगले महीने प्रस्तावित महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना में शामिल होने के लिए कतार में खड़े अवसरवादियों पर कटाक्ष किया. 

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संजय राउत ने मौजूदा परिदृश्य में 'विपक्षी पार्टी' के अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल भी खड़ा किया. उन्होंने कहा, 'मराठवाडा में पानी की कमी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के समान ही महत्वपूर्ण है, लेकिन कोई भी इस विशेष मुद्दे का हवाला देते हुए पार्टी नहीं छोड़ रहा है.' राउत ने लिखा, 'भले ही हर जगह सूखा हो, लेकिन भाजपा और शिवसेना में अन्य दलों के नेताओं का तांता लगा हुआ है. राजनीति एक कठिन कला है, लेकिन अब कुछ लोगों ने इसे सरल बना दिया है.' वह जाहिर तौर पर दल-बदलू नेताओं के उस आम राग का जिक्र कर रहे थे कि वे मतदाताओं की खातिर और अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए अपने मूल दल को छोड़ रहे है. राउत ने कहा, 'जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के बारे में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में शिष्टाचार को बनाए रखा है. वह कांग्रेस ही थी जो आजादी के बाद संसद में शिष्टाचार और परंपराओं से संबंधित कुछ नियम लेकर आई.'

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राउत ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) के गठन के लिए कांग्रेस को श्रेय भी दिया. उन्होंने कहा, 'वह जवाहरलाल नेहरू थे जिन्होंने देश में विपक्षी दल के महत्व को पहचाना. जब शुरू में विपक्षी दल कमजोर था, तो वह कहते थे कि उन्हें प्रधानमंत्री की भूमिका निभाने के साथ-साथ विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभानी होगी.' राउत ने कहा कि यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी नेहरू के नक्शेकदम पर चलते थे. उन्होंने कहा, 'यदि कोई विपक्षी दल नहीं है तो देश का लोकतंत्र कमजोर हो जाता है और राजनीति मनमानी और एकतरफा हो जाती है.'

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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