नई दिल्ली:
तैंतालीस साल के इंतजार के बाद लोकसभा ने अंतत: भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल विधेयक पारित कर दिया लेकिन सरकार को साथ ही एक बड़ा झटका लगा जब लोकपाल और लोकायुक्त को संवैधानिक दर्जा दिए जाने वाला संविधान संशोधन विधेयक गिर गया क्योंकि विधेयक पारित कराने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत सरकार नहीं जुटा पाई। संविधान (116वां संशोधन : नए भाग 14 ख का अंत:स्थापन) विधेयक 2011 के तीनों अनुच्छेद आवश्यक दो तिहाई बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो पाए। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने विधेयक नहीं पारित हो पाने पर कहा कि यह लोकतंत्र के लिए दु:खदायी दिन है। उन्होंने कहा कि लोकपाल को संवैधानिक दर्जा नहीं देने के लिए जनता विपक्ष को कभी माफ नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि राजग, वाम दलों और बीजद सहित अन्य कुछ दलों के एकजुट हो जाने से सरकार दो तिहाई बहुमत जुटाने में कामयाब नहीं हो पाई। लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का सुझाव कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने दिया था।