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गुजरात में बाढ़ में बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से दूध की किल्लत

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गुजरात में बाढ़ में बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से दूध की किल्लत

फाइल फोटो

अहमदाबाद:

गुजरात में पिछले सप्ताह आई बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर गुजरात का बनासकांठा जिला रहा। हालांकि बाढ़ में इंसानों ने तो अपने आप को किसी तरह बचा लिया, लेकिन हजारों दुधारू पशु इस प्रकृतिक प्रकोप में मारे गए। बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से इस जिले के डेयरी उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

बाढ़ में सरकारी आंकड़े के मुताबिक ही करीब 7000 पशु मारे गए हैं। हालांकि लोगों की मानें तो मारे गए पशुओं की संख्या इससे तीन गुनी हो सकती है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में लोगों ने अपने मृत पशुओं के बारे में सरकार को जानकारी नहीं दी। फिलहाल सर्वे का काम चल ही रहा है।

पशुओं के मारे जाने से सबसे ज्यादा प्रभावित यहां का डेरी उद्योग हुआ है। उल्लेखनीय है कि बनासकांठा जिला सिर्फ गुजरात में ही नहीं बल्कि पूरे देश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला जिला माना जाता है।

गुजरात मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन, जो कि गुजरात की सभी दूध सहकारी मंडलियों का दूध लेकर 'अमूल' के नाम से बेचता है, के अधिकारियों के मुताबिक बनासकांठा जिले से ही रोजाना करीब 33 लाख लीटर दूध आता रहा है। जब से बाढ़ आई, तब से दूध उत्पादन में भारी कमी आई है।


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बाढ़ के शुरुआत के दो दिनों में मुश्किल से 4 लाख लीटर दूध आ रहा था। बाढ़ उतरने के बाद धीरे-धीरे दूध उत्पादन क्रमशः बढ़ता गया। अब जब बाढ़ का असर खत्म हो गया है तब भी मुश्किल से 21 लाख लीटर ही दूध आ रहा है। यानि पहले से करीब 12 लाख लीटर कम दूध आ रहा है। इसकी मुख्य वजह पशुओं की मौत से दूध उत्पादन में आई कमी है।

हालांकि गुजरात को आपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन का दावा है कि वह देश में दूध सप्लाई में कमी नहीं आने देगा, लेकिन बनासकांठा को दोबारा अपने दूध उत्पादन के चरम पर पहुंचने में काफी वक्त लग जाएगा।



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