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श्रीराम सेने प्रमुख प्रमोद मुतालिक को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं 

सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम सेने प्रमुख प्रमोद मुतालिक की याचिका पर सुनवाई की.

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श्रीराम सेने प्रमुख प्रमोद मुतालिक को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं 

सुप्रीम कोर्ट

खास बातें

  1. प्रमोद मुतालिक को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
  2. फिलहाल गोवा में प्रवेश नहीं कर पाएंगे
  3. सुप्रीम कोर्ट अगस्त के पहले हफ्ते में करेगा सुनवाई
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम सेने प्रमुख प्रमोद मुतालिक की याचिका पर सुनवाई की.अपनी याचिका के जरिए मुतालिक ने गोवा में प्रवेश की इजाजत मांगी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सितंबर 2017 के बाद के प्रतिबंधित आदेशों को रिकार्ड पर रखकर अर्जी दाखिल करें. कोर्ट अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई करेगा. प्रमोद मुतालिक का कहना है कि बंगलूरू के पब में हंगामा करने के मामले में अदालत उन्हें बरी कर चुकी है. मुतालिक ने कहा है कि गोवा में उनके इस्टदेव का मंदिर भी है, लेकिन गोवा में प्रवेश पर रोक है. हालांकि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट गोवा में प्रवेश करने से रोकने के बंबई हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मुतालिक की याचिका को ख़ारिज कर चुका है.

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पुलिस ने मुतालिक और उनके सहयोगियों पर निषेधाज्ञा लगाई है और इस मामले में बंबई हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने हस्तक्षेप करने से 2 जुलाई को इनकार कर दिया था. जिसके बाद मुतालिक इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे. मुतालिक ने CRPC की धारा 144 के तहत पारित निषेधाज्ञा पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि यह गैरकानूनी है और इसे उनकी बात सुने बिना बार बार पारित किया गया.उन्होंने गोवा जाने की एकपक्षीय अनुमति मांगी थी. साथ ही हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.मुतालिक ने याचिका में कहा कि गोवा सरकार और दक्षिणी गोवा एवं उत्तरी गोवा के जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा बार बार पारित निशेधाज्ञा 'अवैध' है और यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है.मुतालिक को राज्य में प्रवेश करने से रोकने का पहला आदेश उत्तरी गोवा और दक्षिणी गोवा के जिला मजिस्ट्रेटों ने 60 दिनों के लिए जारी किया था. इसके बाद आदेशों की अवधि आगे बढ़ाई गई. 

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