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युद्धपोत को डुबो दो, हज़ारों रोज़गार पैदा हो सकेंगे : महाराष्ट्र सरकार का नौसेना को प्रस्ताव

INS गंगा, हालांकि INS विराट की तुलना में आकार में काफी छोटा है, लेकिन उसका खोल इतनी अच्छी स्थिति में है कि उसे किसी स्थान पर डुबोने के लिए ले जाया जा सके.

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युद्धपोत को डुबो दो, हज़ारों रोज़गार पैदा हो सकेंगे : महाराष्ट्र सरकार का नौसेना को प्रस्ताव

युद्धपोत INS गंग को डुबाने के लिए महाराष्‍ट्र सरकार ने नौसेना को चिट्ठी लिखी है

नई दिल्‍ली:

भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेश-निर्मित गाइडेड-मिसाइल युद्धपोत INS गंगा को डीकमीशन किए जाने के दो माह बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह को आधिकारिक रूप से खत लिखकर अनुमति मांगी है कि पोत को सिंधुदुर्ग तट पर डुबो दिया जाए, ताकि इसे गोताखोरों के लिए कृत्रिम रीफ का रूप दिया जा सके, जिससे इलाके में हज़ारों लोगों के लिए रोज़गार पैदा हो सकेगा.

महाराष्ट्र सरकार की सचिव विनीता सिंगल द्वारा लिखे गए खत में कहा गया है, "पूर्व INS गंगा से बनने वाली प्रस्तावित कृत्रिम रीफ से स्थानीय समुदाय के लिए हज़ारों रोज़गार पैदा होंगे, तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी होगी..."

नीचे दिखाए गए खत में विस्तृत फीज़िबिलिटी रिपोर्ट भी है, और बताया गया है कि कृत्रिम रीफ तैयार करना 'स्वीकार्य कदम है,' जिसे पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व प्रदर्शित करने वाले तथा स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ोतरी देने वाले कदम के रूप में देखा जाता है.

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यह पहला मौका नहीं है, जब नौसेना किसी युद्धपोत को डुबो देने पर विचार कर रही है. वर्ष 2017 में NDTV को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लान्बा ने कहा था कि नौसेना डीकमीशन किए जा चुके INS विराट को फ्लोटिंग म्यूज़ियम में तब्दील करने की इच्छुक है, या "इसे किसी बड़े पर्यटन हार्बर पर ले जाकर डुबो दिया जाए, ताकि यह डाइव साइट में बदला जा सके, और मरीन म्यूज़ियम के रूप में तैयार हो सके..."

दो साल बाद दोनों में से किसी भी प्रस्ताव में कोई खास प्रगति नहीं हो पाई है, और अब यह लगभग तय लग रहा है कि INS विराट भी उसी तरह जहाज़ों को तोड़ने वालों के पास ही जाएगा, जैसे देश का पहला विमानवाहक पोत INS विक्रांत गया था.

INS गंगा, हालांकि INS विराट की तुलना में आकार में काफी छोटा है, लेकिन उसका खोल इतनी अच्छी स्थिति में है कि उसे किसी स्थान पर डुबोने के लिए ले जाया जा सके. अगर योजना कामयाब होती है, तो INS गंगा का अंतिम पड़ाव सिंधुदुर्ग तट से 14 किलोमीटर दूर बिल्कुल साफ-सुथरे पानी में 35 मीटर नीचे होगा, और रीक्रिएशनल डाइवर उस तक पहुंच सकेंगे.

एडमिरल करमबीर सिंह को भेजे गए खत में कहा गया है, "जब बड़े जहाज़ डुबोए जाते हैं, वे मछलियों, कोरल, स्पॉन्ज, सी-फैन आदि के लिए कृत्रिम रिहाइश बन जाते हैं, और सालभर के भीतर यह किसी कोरल रीफ की तरह बिल्कुल स्वतंत्र ईको-सिस्टम बन जाया करता है... अमेरिका में 850 से ज़्यादा पोत कृत्रिम रीफ की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं... अमेरिका के फ्लोरिडा में नौसैनिक पोतों को डुबोकर कृत्रिम रीफ बनाए जाने से हर साल पर्यटन क्षेत्र को साढ़े नौ करोड़ डॉलर से भी ज़्यादा का योगदान हासिल होता है..."

महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव में डीकमीशन किए गए INS गंगा को डुबो देने से हो सकने वाले आठ खास फायदे बताए गए हैं. नौसेना के गोताखोर भी प्रशिक्षण के लिए इस पोत को इस्तेमाल कर पाएंगे.

वर्ष 2006 में अमेरिका ने विमानवाहक पोत ओरिसकानी को पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य संबंधी व्यापक अध्ययन के बाद फ्लोरिडा के तट पर डुबोया था. युद्धपोत के बड़े हिस्सों तक रीक्रिएशनल गोताखोर जा पाते हैं. एक वास्तविक रीफ के साथ सटे इस पोत को आमतौर पर 'ग्रेट कैरियर रीफ' कहा जाता है.

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साल 2006 में अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत ओरिसकैनी को डुबो दिया था

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यदि भारतीय नौसेना महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है, तो पूर्व INS गंगा "डीकमीशन किए गए पोत से बनी देश की पहली कृत्रिम रीफ होगी, जिससे देश की तटीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी.

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विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी नौसेना को भेजने वाली महाराष्ट्र सरकार चाहती है कि यह अनूठा प्रोजेक्ट युद्धपोत सौंपे जाने के बाद छह माह में पूरा हो जाए.

INS गंगा भारतीय नौसेना का गोदावरी-क्लास गाइडेड-मिसाइल युद्धपोत था, जिसे मुंबई में बनाया गया था और इसे दिसंबर, 1985 में कमीशन किया गया था. INS गंगा को वर्ष 2017 में सक्रिय सेवा से मुक्त किया गया था और मार्च, 2018 में इसे डीकमीशन कर दिया गया था. दिसंबर, 1994 में INS गंगा को सोमालिया के मोगादिशू में तैनात किया गया था, ताकि भारतीय सेना की 66वीं ब्रिगेड को वापसी के लिए बैकअप दिया जा सके. भारतीय सेना की 66वीं ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की शांतिसेना के साथ तैनात किया गया था.



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