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स्मृति ईरानी का खुला खत- पीएम मोदी राष्ट्र की बात करते हैं, सोनिया गांधी परिवार की

स्मृति ईरानी ने कहा- सोनिया गांधी अपने भाषण में 2014 की अपनी सत्ता की हार का अफसोस मनाती दिखीं.

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स्मृति ईरानी का खुला खत- पीएम मोदी राष्ट्र की बात करते हैं, सोनिया गांधी परिवार की

स्मृति ईरानी का सोनिया गांधी पर तंज

खास बातें

  1. सत्ता की हार का अफसोस मनाती दिखीं सोनिया
  2. ऐतिहासिक घटना पर अपने विचार सही रूप में नहीं रखे
  3. स्मृति ने पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक खुला खत लिखकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर जमकर निशाना साधा है.इसमें उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर सोनिया गांधी द्वारा दिए गए भाषण के लिए आलोचना की. स्मृति ने लिखा- अपेक्षा की जाती है कि भारत छोड़ो आंदोलन जैसी ऐतिहासिक घटना के बारे में हमें सही रूप में अपने विचार रखने चाहिए थे, लेकिन सोनिया गांधी अपने भाषण में 2014 की अपनी सत्ता की हार का अफसोस मनाती दिखीं. यह 2014 में उनकी पार्टी की हार से पहले तक छाए रहे नेहरू वंश के नियंत्रण को खोने की  'लंबी, दयनीय हताशा' है.

पढ़ें: जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था, उनका आजादी में कोई योगदान नहीं : सोनिया गांधी का तंज

फेसबुक पोस्ट में स्मृति ने कहा कि सोनिया ने यह साबित किया कि पारिवारिक संबंध अन्य चीजों से ऊपर हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा में अपने भाषण में भाजपा नीत सरकार पर परोक्ष निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या अंधकार की ताकतें लोकतंत्र की जड़ें नष्ट प्रयास कर रही हैं.

पढ़ें: गुजरात में लोग बाढ़ से घिरे हैं और कांग्रेस विधायक गायब हैं : स्मृति ईरानी

इस खत में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की भी जमकर तारीफ की. पीएम मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा करो या मरो की शपथ को अपनाने को कहा है. पीएम ने न सिर्फ सरदार वल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की बात की बल्कि महिलाओं के योगदान को भी अपने भाषण में सम्मान दिया.

VIDEO: सोनिया का लोकसभा में भाषण
जहां आजादी का माहौल था, वहां भय फैल रहा
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, जहां आजादी का माहौल था, वहां भय फैल रहा है. कई बार कानून के राज पर भी गैरकानूनी शक्तियां हावी दिखाई देती हैं. भारत छोड़ो आंदोलन एक याद है, जो हमें प्रेरणा देती है कि अगर हमें आजादी को सुरक्षित रखना है, तो हरेक दमनकारी शक्ति के खिलाफ संघर्ष करना होगा, फिर चाहे वह कितनी भी सक्षम क्यों न हो. हमें उस भारत के लिए लड़ना है, जिस भारत में हम विश्वास रखते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था उनका आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं.


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