यह ख़बर 23 नवंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला, 4 अनुरोध लंबित

11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला, 4 अनुरोध लंबित

खास बातें

  • सरकार ने बताया कि देश के 11 राज्यों को विशेष राज्य की श्रेणी में रखा गया है जबकि बिहार, उड़ीसा, राजस्थान और गोवा सरकार से विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा दिये जाने का अनुरोध प्राप्त हुआ है।
नई दिल्ली:

सरकार ने बुधवार को बताया कि देश के 11 राज्यों को विशेष राज्य की श्रेणी में रखा गया है जबकि बिहार, उड़ीसा, राजस्थान और गोवा सरकार से विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा दिये जाने का अनुरोध प्राप्त हुआ है। चार राज्यों ने इस विषय पर अनुरोध किया है। लोकसभा में अजरुन मेघवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा योजना राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा संबंधी मुद्दा सबसे पहले राष्ट्रीय विकास परिषद की अप्रैल 1969 की बैठक में गाडगिल फार्मूला के अनुमोदन के समय सामने आया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की ओर से कुछ राज्यों को विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा दिया गया है। किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने पर विचार के लिए कुछ मापदंड बनाये हैं ताकि उनके पिछड़ेपन का सटीक मूल्यांकन किया जा सके और इसके अनुरूप दर्जा प्रदान किया जा सके। कुमार ने कहा कि इसके तहत अरूणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, नगालैण्ड, त्रिपुरा, उत्तराखंड और मिजोरम को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। उन्होंने बताया कि इन मापदंडों में उक्त क्षेत्र का पहाड़ी इलाका और दुर्गम क्षेत्र, आबादी का घनत्व कम होना एवं आदिवासी आबादी का अधिक होना, पड़ोसी देशों से लगे सामरिक क्षेत्र में स्थित होना, आर्थिक एवं आधारभूत संरचना में पिछड़ा होना और राज्य की आय की प्रकृति का निधारित नहीं होना शामिल है। अश्विनी कुमार ने बताया कि इन मापदंडों को पूरा करने वाले राज्यों को केंद्रीय सहयोग के तहत प्रदान की गई राशि में 90 प्रतिशत अनुदान और 10 प्रतिशत रिण होता है। जबकि दूसरी श्रेणी के राज्यों को केंद्रीय सहयोग के तहत 70 प्रतिशत राशि रिण के रूप में और 30 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है। मंत्री ने बताया कि बिहार के एक दल ने राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने के विषय पर जुलाई 2011 को प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा और आठ सितंबर 2011 को एक अंतर मंत्रालयी समूह का गठन किया गया था।

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