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आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम ने यमुना के बाढ़ वाले क्षेत्र को 'पूरी तरह बर्बाद कर दिया'

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आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम ने यमुना के बाढ़ वाले क्षेत्र को 'पूरी तरह बर्बाद कर दिया'

खास बातें

  1. महोत्सव ने नदी के बाढ़ वाले क्षेत्र को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद किया
  2. इसके बाद जमीन अब पूरी तरह से समतल और मजबूत है
  3. संभवत: अलग तरह की बाहरी सामग्री का प्रयोग किया गया
नई दिल्ली:

एक विशेषज्ञ समिति ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया कि यमुना पर श्रीश्री रविशंकर के ‘आर्ट आफ लिविंग’ (एओएल) द्वारा आयोजित विश्व सांस्कृतिक महोत्सव ने नदी के बाढ़ वाले क्षेत्र को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद किया.’’

एनजीटी द्वारा स्थापित विशेषज्ञ समिति ने इसके प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि समिति ने पाया है कि डीएनडी फ्लाईओवर और बारापूला नाले के बीच मुख्य कार्यक्रम स्थल के लिए प्रयुक्त बाढ़ वाले पूरे क्षेत्र को केवल नुकसान नहीं पहुंचा बल्कि यह पूरी तरह से बर्बाद हो गया. जमीन अब पूरी तरह से समतल और मजबूत है तथा यह पूरी तरह से जलाशय या गड्ढा रहित और लगभग पूरी तरह वनस्पतिरहित है.

समिति ने कहा कि जिस जगह बड़ा मंच लगाया गया वह बहुत ठोस है और संभावना है कि जमीन को समतल एवं ठोस करने के लिए अलग तरह की बाहरी सामग्री का प्रयोग किया गया. डीएनडी फ्लाईओवर से आने रास्तों तथा बारापूला नाले से लेकर दो पुल बनाने के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा लाया गया.


अधिकरण ने जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर के नेतृत्व में सातसदस्यीय विशेषज्ञ समिति को इस साल मार्च में हुए विश्व संस्कृति महोत्सव के स्थल का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था.

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समिति ने 47 पेज की अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस तीनदिवसीय कार्यक्रम के कारण बाढ़ वाले क्षेत्र ने लगभग सभी प्राकृतिक वनस्पति खो दी.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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