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कश्मीर में पत्थरबाजी अमरनाथ यात्रा के लिए बड़ा खतरा, गृह मंत्रालय ने कमर कसी

29 जून को शुरू होकर अगस्त में रक्षाबंधन के दिन आखिरी दर्शन के साथ संपन्न होगी अमरनाथ यात्रा

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कश्मीर में पत्थरबाजी अमरनाथ यात्रा के लिए बड़ा खतरा, गृह मंत्रालय ने कमर कसी

अमरनाथ यात्रा (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केंद्र से सुरक्षा बलों की 279 कम्पनियां मांगीं
  2. नौशेरा में हुई सेना की कार्रवाई का असर यात्रा पर पड़ने की आशंका
  3. पाकिस्तान की ओर से भी हो सकती है गड़बड़ी की कोशिश
नई दिल्ली: सुरक्षा बलों को अंदेशा है कि नौशेरा में हुई सेना की कार्रवाई के बाद इसका असर अमरनाथ यात्रा पर भी पड़ सकता है. घाटी में इस साल लगातार हो रही पत्थरबाजी अगले महीने से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए एक बड़ा खतरा है. यह सुरक्षा बलों का आकलन है. इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों की 90 अतिरिक्त कम्पनियां तैनात करने का फैसला किया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय में इन खतरों की आशंकाओं को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि को सुरक्षा बलों ने यात्रा से सम्बंधित खतरों और इंतजामों के बारे में जानकारी दी. केंद्रीय गृह मंत्रालय के मीडिया एडवाइजर अशोक प्रसाद ने एनडीटीवी को बताया कि "खतरा आतंकियों से है और पत्थरबाजों से भी है. इस बैठक में चर्चा कानून व्यवस्था कायम रखने पर भी हुई."

एनडीटीवी इंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक राज्य पुलिस ने केंद्र से सुरक्षा बलों की 279 कम्पनियां मांगीं हैं. पिछले साल इनकी संख्या 189 थी. राज्य ने सीआरपीएफ और एसएसबी की कम्पनियां मांगी हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिले.

अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक करीब एक लाख 80 हजार लोग अपना नाम दर्ज करा चुके हैं. बैठक में पहलगाम और बालटाल में हो रहे इंतजामों की समीक्षा की गई. इस साल यात्रा 29 जून को शुरू होगी और अगस्त में रक्षाबंधन के दिन आखिरी दर्शन के साथ संपन्न होगी.  

सेना के नौशेरा में हुए ऑपरेशन का यात्रा पर कितना असर पड़ेगा, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई. अशोक प्रसाद ने कहा कि "पाकिस्तान कोशिश करेगा गड़बड़ी करने की, लेकिन हमने पूरे इंतजाम किए हैं कि यात्रा शांतिपूर्ण चले."  केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को इस बात को ध्यान में रखने को कहा है. इस साल 27000 सुरक्षा कर्मी यात्रा सफल बनाने के लिए घाटी में तैनात किए जाएंगे. इस साल यात्रा 40 दिन चलेगी.

केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि के अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुख्य सचिव बीबी व्यास, डीजीपी एसपी वेद सेना के अफसर और अर्ध सैनिक बलों के कई वरिष्ठ अफसर इस बैठक में मौजूद थे.

अमरनाथ यात्रा में कुछ लोग जम्मू से आते हैं. उन्हें सुरक्षा बल काफिले में सुरक्षित बालटाल या पहलगाम के शिविरों तक छोड़ते हैं. लेकिन कुछ यात्री श्रीनगर से अचानक यात्रा करने पहुंच जाते हैं. ज्यादा खतरा उनको लेकर है. इसलिए श्रीनगर से यात्रा पर जाने वाले लोगों के खास इंतजाम किए जा रहे हैं. रूट पर लगने वाले शिविरों पर भी तैनाती बढ़ाई जाएगी.


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