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जिंदगी भर साथ निभाने के लिए तोड़ दी धर्म की दीवार और समाज की बंदिशें

प्रेम संबंधों और शादी-विवाह के मामले में तो कई बार इस मानसिकता से जकड़े लोग हत्या तक भी कर डालते हैं जबकि कानून के मुताबिक कोई भी किसी धर्म या जाति में शादी अपनी मर्जी से कर सकता है.

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जिंदगी भर साथ निभाने के लिए तोड़ दी धर्म की दीवार और समाज की बंदिशें

गैर जाति या धर्म में विवाह करने पर लोग मदद के लिए भी आगे नहीं आते.

खास बातें

  1. दूसरे धर्म में शादी करने क्या गुनाह है ?
  2. लोग क्यों नहीं आते हैं मदद के लिए आगे
  3. शादी करने वालों को छुपानी पड़ती है पहचान
नई दिल्ली:

समाज भले ही 21 वीं सदी में पहुंच गया लेकिन एक बड़ा तबका आज भी जाति और धर्म के बंधनों से मुक्त नहीं हो पाया है. खासकर प्रेम संबंधों और शादी-विवाह के मामले में तो कई बार इस मानसिकता से जकड़े लोग हत्या तक भी कर डालते हैं जबकि कानून के मुताबिक कोई भी किसी धर्म या जाति में शादी अपनी मर्जी से कर सकता है. केरल से जुड़ा एक ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है जहां एक हिंदू लड़की के पिता ने मुस्लिम लड़के पर आरोप लगाया है कि उसकी बेटी को प्यार के चक्कर में फंसाकर उसका धर्म परिवर्तन कराया और उसकी शादी कर ली. अब उसे आतंकी संगठन के लिए काम करने के लिए ढकेला जा रहा है. वहीं लड़की ने कोर्ट में बयान दिया है कि उसने शादी अपनी मर्जी से की है. इस मामले में केरल हाईकोर्ट शादी को 'बकवास' बता चुका है. जबकि अब सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में एनआईए को जांच के लिए निर्देश दिया है. अब पूरी बात जांच के बाद ही पता चल पाएगी. लेकिन ऐसी ही कई और भी शादियां समाज में हुई हैं जिनको समाज मानने के लिए तैयार नहीं है. इन शादियों को 'लव जेहाद' का भी नाम दे दिया जाता है. लेकिन सच्चाई कुछ और ही है.

नेहा और ज़ैनुल की कहानी

love affair

नेहा और ज़ैनुल मेघालय के शिलांग के रहने वाले हैं. नेहा और ज़ैनुल का कहानी किसी फ़िल्म की कहानी से कम नहीं. दोनों फेसबुक पर दोस्त बने, धीरे-धीरे दोस्ती आगे बढ़ती गई. पहली मुलाकात में एक दूसरे से प्यार कर बैठे. नेहा जानती थी कि जैनुल मुस्लिम है. NDTV से बात करते हुए नेहा ने कहा कि लोग कहते हैं कि मुसलमान बहुत ख़राब होते हैं. लेकिन ज़ैनुल से मिलने के बाद नेहा के मन में जो सवाल थे वो दूर हो गए. दोनों का रिश्ता बढ़ता गया. नेहा जब ट्यूशन जाती थी तो ज़ैनुल उसे मिलने आता. दोनों के परिवार के लोगों को पता ही नहीं था कि यह दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं. एक दिन नेहा के परिवार को पता चल गया. उसे घर में बंद कर दिया गया, मोबाइल भी छीन लिया गया. अब नेहा जैनुल से बात नहीं कर पा रही थी. जैनुल को नेहा के बारे में कुछ अता-पता नहीं था. फिर एक दिन नेहा घर भाग गई. दोनों ने वकील से भी बात की. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इतना ही नहीं, वकील ने उसे मदद के नाम पर पैसे भी ऐंठ लिए. फिर दोनों शहर छोड़कर भाग गए. ट्रेन के जनरल डिब्बे में पांच दिन तक घूमते रहे. कई लोगों से मदद मांगी. लेकिन किसी ने मदद नहीं की. दोनों के पास सिर्फ 600 रुपये था, फ़ोन भी नहीं था. जब भी लोगों को पता चलता था कि जैनुल मुस्लिम है तो लोग मदद करने से पीछे हट जाते थे. दोनों को यह भी डर था अगर लोगों को पता चलेगा की अलग-अलग धर्म के हैं, तो ट्रेन में जाना भी मुश्किल हो जाएगा. ज़ैनुल ने 14 फरवरी को NDTV पर रवीश कुमार का शो देखा था, जिसमें धनक के आसिफ ने एक गेस्ट के रूप में हिस्सा लिया था. धनक नाम का यह एनजीओ ऐसे जोड़ों की मदद करता है, जो गैर जाति या धर्म में विवाह करते हैं. कुछ दिन बाद ज़ैनुल और नेहा शादी कर लेते हैं. दोनों की शादी आर्य समाज के रीतिरिवाज हुई है. इस शादी के लिए ज़ैनुल को अपना धर्म बदलना पड़ा. अब वो ज़ैनुल नहीं बल्कि नकुल है. पुलिस ने ज़ैनुल के खिलाफ नेहा को भगा लेने का केस दर्ज किया है.  दोनों के पास शादी के वीडियो के साथ साथ फोटोग्राफ भी है. ज़ैनुल के पास कोई जॉब नहीं है.  जब कि नेहा जॉब के साथ साथ पढ़ाई भी करना चाहती है.

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सुमित और अज़रा की कहानी

love affair
सुमित हरियाणा के सोनीपत की रहने वाले हैं. अज़रा दिल्ली की रहनी वाली है. यह दोनों दिल्ली के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में मिले थे. करीब 6 साल के रिश्ते के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया.  सुमित ने यह बात अपने घर में भी बताई. काफी समझाने के बाद सुमित के घर वाले शादी के लिए राजी हो गए लेकिन अज़रा के घर वाले राज़ी नहीं थे. सुमित से शादी करने के लिए अज़रा ने घर छोड़ दिया. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दोनों की शादी हुई.  दोनों को अपना धर्म बदलना नहीं पड़ा है. सुमित के परिवार ने अज़रा को अपना लिया है लेकिन अज़रा के घरवालों ने अब तक सुमित को नहीं अपनाया है. सुमित उम्मीद कर रहे हैं कि अज़रा के घर वाले एक दिन दोनों को अपना लेंगे.

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राजीव और काशिफ़ा को भी काफी संघर्ष करना पड़ा  

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राजीव और काशिफ़ा को भी अपने प्यार बचाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. राजीव औए काशिफ़ा दिल्ली के साउथ एक्सटेंसन के एक कंपनी में काम करते थे. दोनों एक दूसरे से प्यार कर बैठे. राजीव ने काशिफ़ा के बारे में अपने घर लोगों को बताया और कहा कि वो काशिफ़ा से शादी करना चाहता है लेकिन यह नहीं बताया कि काहिफ़ा मुस्लिम है राजीव के घर वालों को काशिफा पसंद आ गई लेकिन कुछ दिनों के बाद राजीव ने जब बताया कि काशिफा मुस्लिम है तो घर वाले शादी के लिए मना कर दिया. काशिफ़ा के घर वाले भी किसी भी हाल में इन शादी के लिए राजी नहीं हुए. फिर राजीव और काहिफ़ा अपने घर वालों को बिना बताए कोर्ट मैरिज कर लिया.  दोनों के परिवारवालों ने शादी तोड़ने की बहुत कोशिश की. लेकिन राजीव और काशिफ़ा पीछे हटने वाले नहीं थे. जब दोनों परिवार नहीं माने तो राजीव और काशिफ़ा घर छोड़कर चले गए. काशिफा के घर वालों के तरफ से कई बार शादी तोड़ने के लिए कोशिश की गई.  पुलिस केस भी हुआ. राजीव के परिवार ने काशिफ़ा को अपना लिया है लेकिन काशिफ़ा का परिवार अभी भी नाराज़ है.

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