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वध के लिए पशु कारोबार पर रोक, नेताजी की मृत्यु के मुद्दे 2019 में बीजेपी को पड़ सकते हैं भारी!

गृह मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में 1945 में हुई थी. माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में यह एक बड़ा भावनात्मक मुद्दा बन सकता है.

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वध के लिए पशु कारोबार पर रोक, नेताजी की मृत्यु के मुद्दे 2019 में बीजेपी को पड़ सकते हैं भारी!

बीजेपी को मजबूत करने के लिए अमित शाह लगातार देशभर में दौरे कर रहे हैं

खास बातें

  1. अमित शाह के मिशन 2019 पर उल्टा असर पड़ सकता
  2. पश्चिम बंगाल में बीजेपी लगा रही है जोर
  3. दोनों मुद्दों को लेकर पड़ेगा असर
नई दिल्ली: वध के लिए पशु कारोबार पर रोक के फैसले के राजनीतिक नफे-नुकसान की चर्चा भी शुरू हो गई है. इसके साथ ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु के बारे में गृह मंत्रालय के जवाब का भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन दोनों घटनाक्रमों से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मिशन 2019 पर उल्टा असर पड़ सकता है.

अमित शाह 2019 के लोकसभा चुनावों में ज्यादा सीटें जीतने के लिए देशभर की यात्रा पर हैं. वह त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल का दौरा कर चुके हैं और अब केरल जाने वाले हैं. उनका लक्ष्य उन राज्यों में बीजेपी के लिए सीटें जीतना हैं, जहां वह कमजोर मानी जाती है. शाह चाहते हैं कि उत्तर-पूर्व राज्यों, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध प्रदेश जैसे राज्यों में बीजेपी ज्यादा सीटें जीते, लेकिन मवेशियों के कारोबार पर केंद्र सरकार की अधिसूचना का इन सभी राज्यों में जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है.

पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा राज्य सरकारों ने इसे लागू न करने की बात कही है. मेघालय में बीजेपी नेताओं ने ही इसका विरोध किया है और राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने इस अधिसूचना के विरोध में इस्तीफा भी दे दिया है. बीजेपी की सहयोगी एनपीपी ने इसका विरोध करते हुए पीएम मोदी से दखल की मांग की. जबकि तमिलनाडु में विपक्षी दल डीएमके ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है.

गौरतलब है कि इनमें कई ऐसे राज्य हैं जहां गोहत्या पर पाबंदी नहीं है और गोमांस लोगों के आहार का हिस्सा है. हालांकि बीजेपी नेताओं का मानना है कि जिस तरह से युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केरल में चौराहे पर बछड़े की हत्या की उससे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है. बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है. इस साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. यही वजह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस घटना पर तुरंत ही प्रतिक्रिया दे दी.

इसी बीच, यह खबर भी आई है कि गृह मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में 1945 में हुई थी. माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में यह एक बड़ा भावनात्मक मुद्दा बन सकता है, हालांकि बीजेपी लोकसभा चुनाव के बाद से ही बोस के मुद्दे पर काफी सक्रिय रही है. केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल चुनावों के मद्देनजर नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करना शुरू किया था. अभी तक सौ से भी ज्यादा फाइलें सार्वजनिक की जा चुकी हैं और ये वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. पीएम मोदी नेताजी के परिवारवालों से भी मिले थे और उनके परपोते को विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में लाया गया था.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी जबर्दस्त जोर लगा रही है. विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी कांग्रेस-लेफ्ट को पीछे धकेल दूसरे नंबर पर आ गई. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया था. अमित शाह ने हाल ही में राज्य का तीन दिनों का दौरा किया था, लेकिन बोस की मृत्यु के भावनात्मक मुद्दे पर गृह मंत्रालय का जवाब इस मेहनत पर पानी फेर सकता है. राज्य के चुनावों में यह भावनात्मक मुद्दा उठता रहा है.

अब गृह मंत्रालय की दी गई इस जानकारी का बीजेपी से जुड़े नेताजी के परिवारवालों ने ही विरोध भी शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्र सरकार इन दोनों मुद्दों पर दोबारा विचार करेगी. कम से कम मवेशियों के कारोबार की अधिसूचना के मुद्दे पर सरकार ने पुनर्विचार शुरू भी कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक- सरकार को लग रहा है कि इस अधिसूचना की भाषा में कुछ तकनीकी गडबड़ियां हैं. साथ ही कुछ प्रावधानों को जमीन पर लागू करना व्यावहारिक नहीं है. इसी बीच खबर आई है कि सरकार भैंस को इस अधिसूचना के दायरे से बाहर करने पर विचार कर रही है.
 


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