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राज्यसभा में 'बीजेपी के नए गिफ्ट' सुब्रमण्यम स्वामी की टिप्पणी को फिर हटाया गया...

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राज्यसभा में 'बीजेपी के नए गिफ्ट' सुब्रमण्यम स्वामी की टिप्पणी को फिर हटाया गया...
नई दिल्ली:

बीजेपी के नए नवेले सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की टिप्पणी को राज्य सभा में दो दिन के अंदर दूसरी बार हटा दिया गया। विपक्ष की कड़ी आलोचना झेलने के बाद स्वामी की टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया। इस पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने स्वामी के बारे में कहा 'यह संसद में उनका दूसरा दिन है। दो दिन के अंदर उनकी टिप्पणी को दो बार मिटा दिया गया। साल में 365 दिन होते हैं और कितनी बार उनके शब्दों को हटाएंगे? इस व्यक्ति की इतनी उम्र हो गई है लेकिन यह अभी भी सड़क छाप भाषा और संसद की भाषा में फर्क नहीं समझ पाए हैं।' आज़ाद ने स्वामी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उनमें अभी तक परिपक्वता नहीं आई है, उन्होंने अभी तक अपने बाल सफेद नहीं होने दिए हैं।

'स्वामी को बुलाया सीआईए एजेंट'
76 साल के स्वामी काफी वक्त से अपने बयानों द्वारा कांग्रेस और गांधी परिवार उकसाने के लिए जाने जाते रहे हैं। संसद में स्वामी तब विपक्ष के निशाने पर आए जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर चर्चा के दौरान उन्होंने इटली को घसीट लिया। इस पर गुस्साए कांग्रेस सदस्यों ने स्पीकर के आसपास घेरा बना लिया और स्वामी को 'सीआईए एजेंट' बुलाना शुरू कर दिया। राज्यसभा के उप सभापति पीजे कुरियन ने स्वामी की टिप्पणी को हटाने का आदेश दिया और साथ ही बीजेपी के सांसद को चेतावनी भी दे डाली। कुरियन ने कहा कि 'शून्यकाल में बाधा डालने की जबरन कोशिश की जा रही है।' इस पर आज़ाद बीच में आए और बोले 'समस्या हमारे साथ नहीं है। समस्या है बीजेपी का यह नया तोहफा जो हमें काम करने नहीं देगा।'


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गौरतलब है कि स्वामी ने बुधवार को संसद में अपने पहले ही दिन अगस्तावेस्टलैंड घोटाले का मुद्दा उठाया और उसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम भी लिया। बात इतनी बढ़ गई कि विपक्ष और बीजेपी के सदस्यों के बीच मार्शलों को बुलाना पड़ गया। बाद में स्पीकर ने यह कहते हुए अपनी टिप्पणी हटा दी कि वह उन सदस्यों के नाम नहीं ले सकते जो सदन में अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते। बता दें कि इस घोटाले से जुड़े इटली के हाईकोर्ट के एक आदेश में कांग्रेस पार्टी की प्रमुख सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह, अहमद पटेल समेत कुछ अन्य लोगों के नाम आए हैं। इसी फैसले के बाद मामले ने संसद में तूल पकड़ लिया है।

वैसे कांग्रेस के साथ स्वामी की झड़प कोई नई नहीं है। नेशनल हेरल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अदालत तक लाने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ही हैं। कभी प्रतिभाशाली गणितज्ञ के तौर पर पहचाने जाने वाले स्वामी खुद को राजीव गांधी के काफी करीबी दोस्त बताते आए हैं। डॉक्टर स्वामी भारत आने से पहले हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफ़ेसर हुआ करते थे और उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल सैमुअलसन के साथ एक शोध पत्र पर काम किया था।



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