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अयोध्या मामला: स्‍वामी ने राम जन्‍मभूमि पर मांगा था पूजा का अधिकार, SC का जल्‍द सुनवाई से इनकार

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी.

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अयोध्या मामला: स्‍वामी ने राम जन्‍मभूमि पर मांगा था पूजा का अधिकार, SC का जल्‍द सुनवाई से इनकार

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की फाइल फोटो

नई दिल्ली: अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी. बीजेपी नेता स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अयोध्या राम जन्मभूमि में पूजा के अधिकार की मांग की है. दरअसल, अयोध्या मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनकी याचिका को मुख्य मामले से अलग कर दिया था. स्वामी ने अपनी याचिका में कहा था कि सम्पत्ति के अधिकार को लेकर मुकदमा नहीं है, लेकिन पूजा करने का अधिकार मुझे है. प्रत्येक हिन्दू को है और पूजा का अधिकार सम्पत्ति के अधिकार से ऊपर है.

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 14 मार्च से अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर रोजाना सुनवाई कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुका था कि इस मामले को आस्था की तरह नहीं बल्कि जमीनी विवाद के तौर पर देखेगा. सुप्रीम कोर्ट की पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था.

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गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था. इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए, जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी. इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई. 

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सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद से यह मामला लंबित है.
 


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