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SC के कामकाज को लेकर दाखिल याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- CJI पर अविश्‍वास नहीं दिखा सकते

सुप्रीम कोर्ट में बेंचों के गठन और उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर पारदर्शिता और नियम बनाने के मामले को लेकर दाखिल याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

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SC के कामकाज को लेकर दाखिल याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- CJI पर अविश्‍वास नहीं दिखा सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CJI खुद ही संस्थान हैं और उन्हें केस आवंटन का अधिकार है

खास बातें

  1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चीफ जस्टिस संस्थान के हेड हैं
  2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि CJI पर अविश्वास नहीं दिखाया जा सकता है
  3. कोर्ट ने कहा कि यह याचिका सकैंडलस है
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में बेंचों के गठन और उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर पारदर्शिता और नियम बनाने के मामले को लेकर दाखिल याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चीफ जस्टिस संस्थान के हेड हैं और उन पर अविश्वास नहीं दिखाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CJI कार्यालय को स्वतंत्र सेफ गार्ड दिए गए हैं और उनके पास बेंचों के गठन को लेकर एक्सक्लूजिव अधिकार है.

चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठे अहम सवाल...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CJI खुद ही संस्थान हैं और उन्हें केस आवंटन का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आशंका के आधार पर चीफ जस्टिस के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में बेंचों के गठन और उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर पारदर्शिता और नियम बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि यह याचिका सकैंडलस है और संविधान ने चीफ जस्टिस पर सुप्रीम कोर्ट का कामकाज चलाने के लिए भरोसा किया है.

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वकील अशोक पांडे की याचिका में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय में विभिन्न पीठों के गठन और अधिकार क्षेत्र के आवंटन के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार को आदेश दिया जाए. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक विशेष नियम बनाने का भी एक निर्देश मांगा गया है कि CJI कोर्ट में तीन जजों की बेंच में CJI और दो वरिष्ठ जज हों जबकि संविधान पीठ में 5 सबसे वरिष्ठ जज हों या तीन सबसे वरिष्ठ और दो सबसे जूनियर जज हों.

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याचिका में कहा गया है कि चार सबसे वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्य न्यायधीश के बेंच बनाने और अधिकार क्षेत्र के निपटारे के संबंध में  नियम निर्धारित करना राष्ट्रीय हित में है.

VIDEO: न्यायपालिका के भीतर के सुलगते सवाल  



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